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"कितनी बेबसी छुपा रखी है..
कितनी मासूमियत बचा रखी है..
हर सहर..
इक नकाब पहने..
रूह को दफनाये..
महफिल तक जाने को..
बारहां..निशाँ छुपाये..
बेरब्त ख्यालों की खलिश ने..
बिसात-ए-नजाकत उखड़वाये..
इक दर्द का मंज़र..
मिटटी के जिस्म सजाये..
बेवक्त दास्तान-ए-अब्र..
इक बूँद में समंदर समाये..
उफ़..रंजिश-ए-ज़िन्दगी..
कारवां कितने कतराये..
आशियाँ प्यासा ता-उम्र..
नश्तर मजरूह बिकवाये..
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कोने में रखी अलमारी..
रेंगती हयात जैसी तनहा..
..
सच..
कितनी बेबसी छुपा रखी है..
कितनी मासूमियत बचा रखी है..!"
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Very few people have such God's gift to be able to express their feelings in such a nice way.....cheers
ReplyDeleteधन्यवाद भाविन जी..!!
ReplyDeleteबहुत सुंदर...
ReplyDeleteउम्दा!!
ReplyDeleteगणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
धन्यवाद महफूज़ अली जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
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