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"हर लम्हा आँख नम कर जाते हो..
हर ख्वाब सज़ा कम कर जाते हो..१
पशेमां मौसम हुए जाते हैं..अब..
क्यूँ..तन्हाई में दम भर जाते हो..२
नूर से रंगी तस्वीर वो पुरानी..
फ़क़त..सांसों में जम* भर जाते हो..३
दर्द मचलता है चुपके-चुपके..
खामोशी से मुझमें रम जाते हो..४..
रिवायत-ए-मोहब्बत-ए-आलम..
दो गैरों को हम-दम कर जाते हो..५..!"
* जम = जाम..
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दर्द मचलता है चुपके चुपके
ReplyDeleteख़ामोशी से मुझमे रम जाते हों
रिवायत-ए-मोह्हब्बत-ए-आलम
दो गेरों को हम-दम कर जाते हो
बहुत खूब
दर्द मचलता है चुपके चुपके...बेहतरीन सोच!!
ReplyDeleteगणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
सादर
समीर लाल
गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें....
ReplyDeleteधन्यवाद ह्रदय पुष्प जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद मिथिलेश जी..!!
ReplyDeleteBahut khub..
ReplyDeleteSahaj samjh me aayi aapki rachna
Ham-Dam sirsak,
Post ke sath laga picture
Kamal ka combination.
Gantantra divas ki badhai..
Arshad Ali