Sunday, May 16, 2010

'मतला..'




...

"टूटा है..
आशियाँ फिर..
नम हुईं..
आँखें फिर..
जला है..
गुलिस्तान फिर..
बहा है..
दरिया फिर..

कब तक..
मतला लिखूँ..
गुफ्तगू का..!!"

...

6 comments:

  1. सुन्दर शुरुवाद हुई , मगर जुबाँ खामोश हुई ।

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  2. गुफ्तगू का मतला यूँ ही चलता रहेगा
    बेशक देश ये यूँ ही जलता रहेगा

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  3. धन्यवाद शारदा जी..!

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  4. धन्यवाद उम्मेद जी..!!

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