Saturday, May 15, 2010

'बेवफ़ा..'





...


"कुछ पल जुदाई के..
उधार लाया था..
माज़ी के कूचे से..
सोचा था..
इक आशियाँ बना..
रूह में छुपा रखूँगा..
आज फिर..
उलझा हूँ..
ख्यालातों से..
क्यूँ वफ़ा निभाई..

काश..
बेवफ़ा होता..
मैं भी..!!"


...

9 comments:

  1. सुंदर क्षणिका..रूह के पोशीदा दर्द के परवाज सी..

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  2. जवाब नहीं ....आपका

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  3. धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

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  4. धन्यवाद दिलीप जी..!!

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  5. धन्यवाद अपूर्व जी..!!

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  6. धन्यवाद देवेश प्रताप जी..!!

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  7. Kya baat hai...

    shabdo aur bhavnao ka accha mishran hai...

    bahot khoob

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!