Thursday, July 28, 2011

'खज़ाना-ए-दिल..'



...


"दफ़ना आया हूँ..
वजूद..
रोज़-रोज़ की दलीलों ने..
ऐवें ही..
खज़ाना-ए-दिल..
बेज़ार किया..!!"

...

19 comments:

  1. धन्यवाद निलेश माथुर जी..!!!

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  2. धन्यवाद कविता रावत जी..!!!

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  3. बहुत बढ़िया।
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    कल 29/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. धन्यवाद सागर जी..!!

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  5. मुझे लगता है आप 'मितभाषी' हैं.
    या यह मेरा भ्रम है,जरा बताईयेगा
    प्रियंका जी.
    शब्दों की अनोखी जादूगिरी करतीं हैं आप.

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  6. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  7. बहुत बढि़या ... ।

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  8. धन्यवाद राकेश कुमार जी..!!

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  9. धन्यवाद डोरोथी जी..!!

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  10. धन्यवाद सदा जी..!!

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  11. धन्यवाद निवेदिता जी..!!

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  12. धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!

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  13. धन्यवाद संगीता आंटी..!!!

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  14. app to bahut achha likhti hain. :)

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