Friday, July 29, 2011

'रसीली मधुशाला..'




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"डूबी है रंग में आज रुबाई..
चलो..
फिर सैर पर चलें..

बिछी थीं..
मुस्कराहट की सुगंध..
तन की अभिलाषा..
जहाँ..

उगता था दिनकर..
साथ जीवन परिभाषा..

मद्धम उजाला..
इन्द्रधनुषी जिज्ञासा..

प्रेम आदर विनम्रता..
बहती थी हर क्षण..
संस्कारों की भाषा..

खुशहाली की चादर..
करती तृप्त पिपासा..

चलो..
खोज लायें..
दूरियां पाटने वाली..
रसीली मधुशाला..!!"


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5 comments:

  1. sunder madhusala ki abhivaykti....

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  2. बहुत ही खूबसूरती से मधुशाला को और भी सुंदर बना दिया आपने...

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  3. धन्यवाद सागर जी..!!!

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  4. bahut hi sundar rachna mam....

    pahli baar apke blog par aaya hun, padhkar acha laga . aaj se hi follow kar raha hun apko..
    jjai hindjai bharat

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  5. धन्यवाद सजन आवारा जी..!!

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