बारिश और आपकी खुबसूरत पंक्तिया दोनों ही मन को भीगो गयी....
बारिश बेगानी क्यों है वो तो प्रिय सखी जैसी होती है
बारिश से ..नाता ..मूड के हिसाब से बदलता रहता है
धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
धन्यवाद सागर जी..!!
धन्यवाद शेफाली जी..!!
धन्यवाद दी..!!
भीगा गई..
धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
बारिश और आपकी खुबसूरत पंक्तिया दोनों ही मन को भीगो गयी....
ReplyDeleteबारिश बेगानी क्यों है
ReplyDeleteवो तो प्रिय सखी जैसी होती है
बारिश से ..नाता ..मूड के हिसाब से बदलता रहता है
ReplyDeleteधन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
ReplyDeleteधन्यवाद सागर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद शेफाली जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद दी..!!
ReplyDeleteभीगा गई..
ReplyDeleteधन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!
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