Tuesday, October 11, 2011

'सुलगती रूह..'




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"महफ़िल-ए-मोहब्बत..
ज़र्रा-ज़र्रा..
सुलगती रूह..
मुबारक तुम्हें..
अरमानों की जुस्तजू..!!!"

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7 comments:

  1. कायम रहे 'अरमानों की जुस्तजू'.

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  2. bhaut pyari 'अरमानों की जुस्तजू'

    - Mere Shabd

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  3. धन्यवाद मयंक साहब..!!

    आभारी हूँ..!!

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  4. धन्यवाद शेफाली जी..!!

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  5. धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!