
...
"किस तरह शुक्रिया अता करूँ..
जिस नफ्ज़ गहरा रहे थे..
उदासी के बादल..
तुमने थामा था..
जिस दम टूट रहे थे..
साहिल के काजल..
तुमने थामा था..
जिस लम्हा फ़ना हो रहे थे..
नज़्म के आँचल..
तुमने थामा था..
आज जब जा रहा हूँ..
परदेस..
और..
लौटना ना मुमकिन..
अब भी थामोगे ना..
हर घड़ी..!!!"
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really loved this one
ReplyDeletelast 4 lines were superb
Badhiya....
ReplyDeletewww.poeticprakash.com
बहुत ही बढ़िया।
ReplyDeleteसादर
कल 09/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
ReplyDeleteधन्यवाद!
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
ReplyDeleteखूबसूरत ...
ReplyDeleteबहूत हि प्यारी और सुंदर रचना hai...
ReplyDeleteसुन्दर भावपूर्ण रचना !
ReplyDeleteबधाई !
बेहतरीन............
ReplyDeleteबहुत बहुत बढ़िया...
ReplyDeletebahut badiya..
ReplyDeletenavvarsh kee haardik shubhkamnanyen!
धन्यवाद aisha जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद चिराग जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद प्रकाश जैन जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!
ReplyDeleteसादर आभार..!!
धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद रीना मौर्या जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद कैलाश शर्मा जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद मनीष सिंह निराला जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद अरुण कुमार निगम जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद विद्या जी..!!
ReplyDeleteधनयवाद कविता रावत जी..!!
ReplyDeleteजो अपना है..यकीनन थामेगा .
ReplyDeleteकाजल के साहिल ..समझ नहीं आया .