प्रियंकाभिलाषी..
Sunday, October 28, 2012
'ह्रदय-व्यापार..'
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"देखो, थम गयी सृष्टि..
रुक गया ह्रदय-व्यापार..
अद्भुत अतुल्य सौन्दर्य तुम्हारा..
करता विभोर तार-तार..!!"
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Friday, October 26, 2012
'छाप..'
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"कोई जो मिले हमसफ़र..
सफ़र तक साथ दे..
ना थामे हाथ मेरे..
बस रूह को छाप ले..!!"
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Thursday, October 25, 2012
'चाहत के अशआर..'
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"जानती थी..
नहीं आओगे..
ले जाना उस चौराहे पर खड़े..
गुलमोहर के तने पर लिखे..
चाहत के अशआर..
और..
दीवानगी के निशाँ..!!"
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Saturday, October 13, 2012
'प्रेम..'
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"नज़र भर का फेर..
तुम्हारा निश्छल प्रेम..
जीवन भर का स्तम्भ..
तुम्हारा पवित्र प्रेम..
नदिया भर का खनिज..
तुम्हारा कलकल प्रेम..!!"
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Sunday, October 7, 2012
'कविता..'
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"मेरी कविता की..
हर पंक्ति..
रची-बसी तुमसे..
सुबह की पहली लाली लिये..
चहकी तुमसे..
दोपहर की अल्हड़ वाणी लिये..
दहकी तुमसे..
शाम की मदमस्त रवानी लिये..
बहकी तुमसे..
रात की भीगी चांदनी लिये..
महकी तुमसे..!!"
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Saturday, October 6, 2012
'लम्हे..'
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"सफ़र में मिले कुछ अजनबी..
चंद लम्हे देकर..
सौदा-ए-रूह किया..!!!"
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Thursday, October 4, 2012
'बेचैनी की चादर..'
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"बेचैनी की चादर ओढ़ी कल रात..
याद तेरी रची-बसी सूत-सी कोमल..!!"
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'बेजान रातें..'
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"ये चाहत से तरबतर यादें..
बन जुगनू..
झिलमिलाती रहीं..
मेरी बेजान रातें..!!"
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