सुन्दर कविता
सुन्दर रचना ..............
चाहत के अशआर जानती थी नहीं आओगे , ले जाना उस चौराहे पे खड़े ,गुलमोहर के तने पर लिखे ,चाहत के अशआर और दीवानगी के निशाँ .खूब सूरत प्रयोग धर्मी भाव कणिका .
धन्यवाद यशोदा अग्रवाल जी..!!
धन्यवाद मयंक साब..!!
धन्यवाद ओंकार जी..!!
धन्यवाद अंजू चौधरी जी..!!
धन्यवाद डॉ संध्या तिवारी जी..!!
स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
सुन्दर कविता
ReplyDeleteसुन्दर रचना ..............
ReplyDeleteचाहत के अशआर
ReplyDeleteजानती थी नहीं आओगे ,
ले जाना उस चौराहे पे खड़े ,
गुलमोहर के तने पर लिखे ,
चाहत के अशआर और दीवानगी के निशाँ .
खूब सूरत प्रयोग धर्मी भाव कणिका .
धन्यवाद यशोदा अग्रवाल जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद मयंक साब..!!
ReplyDeleteधन्यवाद ओंकार जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद अंजू चौधरी जी..!!
ReplyDeleteधन्यवाद डॉ संध्या तिवारी जी..!!
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