Wednesday, April 3, 2013

'जिद्दी यादें..'



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"बंद करूँ खिड़कियाँ कितनी..
खींच डालूँ दरवाजे बेशुमार..

जिद्दी यादें..जातीं ही नहीं..!!"


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6 comments:

  1. ye bilkul sahi yaden hee hai to hai jo insan ko dard datee hai

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  2. सच कहा है ... ये चिपक् जाती हैं जिस्म के साथ ...

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  3. धन्यवाद गोपाल जी..

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  4. धन्यवाद दिगम्बर नासवा जी..!!!

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  5. धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!!

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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!