प्रियंकाभिलाषी..
Tuesday, December 10, 2013
'साज़..'
...
"मेरे हाथों में जमा है अब तलक..
उसके नर्म हाथों का एहसास..
आँखों में गाढ़ा है अब तलक..
उसकी छुअन में लिप्त साज़..
कुछ एहसास..साज़..पिघल हुए..
नश्तर-से प्यारे..नासूर-से ख़ास..!!"
...
--मियाद..साहिल..सब बेमाने..
1 comment:
priyankaabhilaashi
December 12, 2013 at 10:23 AM
धन्यवाद राजीव कुमार झा जी..!!
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स्वागत है..आपके विचारों का..!!!
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धन्यवाद राजीव कुमार झा जी..!!
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