Wednesday, December 11, 2013

'बेदख़ल होतीं राहें..'




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"खुशियाँ भी झूठी हैं..गम तो अपने रहने दो..!! सुनो, चाहे जितना दम लगा लेना..मुझसे न ले सकोगे अपनी रूह का हिस्सा..जो सिर्फ मेरा है..और ता-उम्र रहेगा..!!"

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--बेदख़ल होतीं राहें..

2 comments:

  1. रूह का संबंध रूह से है ... उसे लेना संभव कहां ...

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  2. धन्यवाद दिगम्बर नासवा जी..!!

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