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"जिस्मों की मियाद ढूँढ रही हूँ.. हर तार में अपना राग तलाश रही हूँ..!! याद है न, मिलन की पहली रात.. मध्य-रात्रि का पहला पहर.. बोसे की बौछार..और तेरा वो 'टाईट हग'..!!
आओ जां.. ज़िन्दगी के वो हसीं पल इंसाफ़ चाहते हैं..रूमानी रंगत का निशां चाहते हैं..!!"
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