प्रियंकाभिलाषी..

Tuesday, January 11, 2022

'आरज़ू..'

›
... "हम क्या सोचते हैं और क्या होता है.. मौसम के खेल में तराज़ू बिकता है.. लोगों का ईमान बदलते वक्त नहीं लगता..और इल्ज़ाम की ...
Monday, January 10, 2022

तुम!

›
... "सुनो.. तुम अथाह हो, मेरे अंतस के सागर.. तुम विराट हो, मेरे आकाश के पर्वत.. तुम अविरल हो, मेरे अध्याय के प्रमाण.. तुम स...
4 comments:
Wednesday, August 4, 2021

'वजूद..'

›
... "फिर वहीं लौट आता हूँ.. हर दफ़ा.. उस इक वादे के बाद.. न तेरा हो सका.. न वजूद अपना कायम रहा.. खामोशी के खंज़र.. नक़ाब में मिलेंगे.. दास...

'बहाने..'

›
... "वो माँग रहा करीब आने के बहाने.. किसी को हारते हुए देखा है, ऐसे..!!" ...
Tuesday, August 3, 2021

'पाठ जीवन के..'

›
... "अब कोई साथ रहे ना रहे.. कोई आरज़ू नहीं, कोई फिक्र नहीं, कोई फर्क नहीं... आएँ, जाएँ, रुकें, बैठें ....उनकी मर्ज़ी..!!" ... --#कु...

'खुशियाँ..'

›
... "लहकता खुशियों का अंबार.. क्षण-क्षण समृद्ध अध्यात्म संसार..!!" ...
1 comment:

'वक़्त'

›
... "वक़्त पसरा रहा मेज़ पर देर तक.. शाम का हिस्सा, कुछ यूँ बयां हुआ..!!" ...
1 comment:
Thursday, June 17, 2021

इश्क़

›
... "मुझे इस बेवज़ह की बेतरतीबी से इश्क़ है..!!" ...
Tuesday, June 15, 2021

'प्यार से सागर या सागर से प्यार'..

›
*** प्यार में सागर था या सागर से प्यार.. उत्तर कठिन है परंतु दिशा..दशा..सही?  क्या यह सच है इंसान प्यार में बंध कर उलझ जाता है.....
Friday, January 15, 2021

'महफ़िल..'

›
... "सुकूँ के दरवाजे साकी खुले छोड़ गया.. जाने कौन रुका और क्या बह गया.. तुम मौलिक अधिकार का प्रचार करते रहे.. मेरा जुनू...
4 comments:
Sunday, November 29, 2020

'मोहब्बत के मसीहा..'

›
#नवंबर ... "दर्ज़ करने हैं एहसासों के निशां सारे, तेरे कूचे की दहलीज़ पर.. तुम क़रीब आने के इंतेज़ाम दुरुस्त करने दो, आज शाम.....
2 comments:
Tuesday, October 27, 2020

'लफ्ज़ों की कैफ़ियत..'

›
Credit : कुछ रूमानी रूह जो बरबस आपको आपसे मिलवाने आतीं हैं.. ... "समंदर की आग कौन जानता है.. पानी का दर्द कौन समझता है.. आ...
1 comment:
Sunday, February 10, 2019

'मेरे हौसलें..'

›
... "थक चुके होंगे तो बैठ जाएँगे.. मेरे हौसलें मेरे बिन, कहाँ जाएँगे..!!" ...
2 comments:

'विचित्र संयोग..'

›
... "सपनों का वो पहले करिश्मा अब कहाँ स्थित है.. किसी ने सोचा, किसी ने ढूँढ़ने का यत्न किया, किसी ने कोई रपट लिखवाई.. सब यथावत ह...
2 comments:
Monday, October 15, 2018

'थॉट्स का मूवमेंट..'

›
... "जब थॉट्स का मूवमेंट किसी भी डायरेक्शन में होने लगे, समझना चाहिए कि खतरनाक स्टंट का प्रोग्राम लिखा है आगे.. मेरी डायरी बिल्...
6 comments:

'मेरी आयतों का गुमां..'

›
... "तुम मेरे अंतर्मन को सींचते हो उस घूँट से, जो लिखा था दर्द की रात में.. तुम प्रेम की तरह इश्क़ पर परत चढ़ाते हो पराली की, जिसे...
Friday, February 2, 2018

'अश्क़-ए-प्याले..'

›
... "दोस्त थे जो.. आज कतराते हैं.. मर्ज़ पुराने.. चलो, सहलाते हैं.. कौन समझे.. दर्द मेरा.. कहाँ कोई.. रहा सवेरा.. यादें...
3 comments:
Monday, January 22, 2018

'सिलवटें..'

›
... "माँगा होता.. काश तुमने.. मोहब्बत का सफहा कोई.. भेज देता.. पोर का एहसास वहीं.. सिलवटें उलझतीं थीं.. छुअन को अपनी.. ...
6 comments:
Sunday, December 31, 2017

'मियाद आसमां की..'

›
... "मोहब्बत की ख़ुशबू या देह की सुगंध.. आलिंगन यार का.. या गिरफ़्त महबूब की.. जानते हो न.. बेइंतिहां चाहती हूँ तुम्हें.. कुछ ...
4 comments:

'नये साल की एवज़ में..'

›
नया साल क्या लाएगा? आज जब मस्तिष्क ने पूछ ही लिया तो अब लिखना पड़ेगा.. #जां.. "मेरी रहगुज़र के सौदागर.. मेरी आहों के समंदर.. मेरे...
2 comments:

'मोटिवेशनल धक्के..'

›
... "चाहत ज़िन्दगी से रखना बहुत, दोस्तों.. लिहाफ़ में इसके काँटों में लिपटे फूल मिलेंगे.. मेरी उँगलियों के पोर जब-जब भी इन काँटों स...
1 comment:
Friday, October 6, 2017

'जस्ट माइन चाँद..'

›
... "लिखने के अपने रीज़न्स रहे हैं.. हमेशा से.. चंद लम्हों को.. गुज़ारिश की छूट नहीं.. रूमानियत का हैंगओवर.. दिल को तड़पाता क...
6 comments:

'मुहब्बत के पैमाने..'

›
... "जिस्म पे तेरे.. निशां जितने.. मुहब्बत के.. पैमाने उतने.. लकीरों के खेल.. सजते जहाँ.. मुझे पाना.. एकदम वहाँ.. रवायत...
4 comments:
Wednesday, July 26, 2017

'रजनीगंधा ..'

›
... "रजनीगंधा का फूल.. अब तक महकता है.. उस उर्दू-हिंदी डिक्शनरी में.. हर बार उठाती हूँ.. शेल्फ से जब.. उंगलियाँ ख़ुद-ब-ख़ुद...
8 comments:
Sunday, June 4, 2017

'जाड़े की दस्तक..'

›
... "जाड़े की दस्तक से ही आया था.. प्यार तुम्हारा.. इस बरस पूरे हो जाएँगे.. 6 बसंत..6 ज्येष्ठ..6 सावन..और 6 कार्तिक.. हाँ, तब ह...
2 comments:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.