Saturday, February 2, 2013

'स्पंदन..'





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"तुम्हारा निर्मल विशाल ह्रदय रस-रंग में डुबो अनेकानेक तारामंडल की सैर करा जाता है..विस्तृत, विराट, व्यापक, समृद्ध, सुसज्जित और सुरीला--ऐसा ही है ना तुम्हारे वाद्य-यंत्र से निकलता संगीत, जो मेरी हर कोशिका को सजीव कर तुम्हारा स्पंदन और निखार जाती है..!!!"


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----नितांत एकाकी के कुछ अभिन्न क्षण..

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्‍कर अहर्निश said...

बहुत खूब, लाजबाब !

संजय भास्‍कर अहर्निश said...

बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ .... सुंदर प्रस्तुति