Friday, February 2, 2018

'अश्क़-ए-प्याले..'






...

"दोस्त थे जो..
आज कतराते हैं..
मर्ज़ पुराने..
चलो, सहलाते हैं..

कौन समझे..
दर्द मेरा..
कहाँ कोई..
रहा सवेरा..

यादें जवां..
साथ रखना..
मोहब्बत रवां..
बेमौसम चखना..

भुलाऊँ कैसे..
अश्क़-ए-प्याले..
मेरे अपने..
उसके हवाले..

दुआ माँगू..
पल-पल..
रहना खुशदिल..
कोई हलचल..!!"

...

--#दर्द कैसे-कैसे..

3 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (04-02-2018) को "अपने सढ़सठ साल" (चर्चा अंक-2869) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar said...

बहुत बढ़िया

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...