बस यूँ ही कुछ लिखा है आज..
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"जाम-ए-उल्फत लिखा है आज..
रूह को बेगैरत लिखा है आज..१..
कहते हैं ख्वाइशों के रेले..कुछ..
बेगानों को अपना लिखा है आज..२..
कह दूं तो रंजिश होगी..ए-वाईज़..
हसरतों को पैगाम लिखा है आज..३..
साहिल हूँ वादियों का..ए-सनम..
तूने क्यूँ अपना हयात लिखा है आज..४..
सूनी है मुरादें..बारहां..मियाद लम्बी..
किस्सा नहीं बेज़ार लिखा है आज..५..
खलिश उठती है..तूफानी बस्ती..
महताब को कातिल लिखा है आज..६..!!!"
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