Showing posts with label रूमानियत... Show all posts
Showing posts with label रूमानियत... Show all posts

Sunday, November 29, 2020

'मोहब्बत के मसीहा..'





#नवंबर

...

"दर्ज़ करने हैं एहसासों के निशां सारे, तेरे कूचे की दहलीज़ पर.. तुम क़रीब आने के इंतेज़ाम दुरुस्त करने दो, आज शाम.. जानते हो न, जाड़े की रातों में तुम्हें एक वॉर्म टाइट हग़ के बिना नींद नहीं आती..

इन इंटेंस गहरी आँखों में यूँ भी डूब जाएँगीं मेरी साँसें..तुम्हारी लैवेंडर फ्रैगरैंस उस नीले स्कार्फ़ की तरह मेरे ब्लज़ेर पर महक रही है.. कैसे भेदते जाते हो मेरे दिल के वो सारे राज़, जो चट्टान माफ़िक कोई हिला सकता नहीं..

प्रेम से परिभाषित दोस्ती का पहला कदम पार कर लें.. आओ, इस दफ़ा इक नया आयाम चुन लें..

तुम ता-उम्र हमराज़ रहना, मेरी मोहब्बत के मसीहा!"

...

--#मोहब्बत का मौसम

Monday, October 15, 2018

'मेरी आयतों का गुमां..'





...

"तुम मेरे अंतर्मन को सींचते हो उस घूँट से, जो लिखा था दर्द की रात में..
तुम प्रेम की तरह इश्क़ पर परत चढ़ाते हो पराली की, जिसे जलना ही होगा इस मर्तबा भी..
तुम सितारों को ढालते हो उन निष्ठुर कठोर साँचों में, जहाँ मोल छालों का लगता है..
तुम मेरे रुआब को पैना करते हो उस कैफ़ियत से, जहाँ सामान मकां हो जाता है..

तुम मेरे तिलिस्म का सच हो..
तुम मेरी रुबाई का फाया हो..
तुम मेरे अल्फ़ाज़ का जिस्म हो..
तुम मेरी आयतों का गुमां हो..

तुम दिलबर हो..!!"

...

Friday, October 6, 2017

'जस्ट माइन चाँद..'





...


"लिखने के अपने रीज़न्स रहे हैं..
हमेशा से..

चंद लम्हों को..
गुज़ारिश की छूट नहीं..
रूमानियत का हैंगओवर..
दिल को तड़पाता क्यों है..

कुछ अनकहे-अंहर्ड सीक्रेट्स..
बेवज़ह पलते रेशमी रात..
फैसिनेशन के हनी-ट्रैप में..
पूर्णिमा की शीतलता घुल गयी..

तुम्हें बचपन से बैंचमार्क मान..
कितने लफ्ज़ तराशे..
कितने ऑफबीट थॉट्स को..
रूह के बेसमैंट में..
फुल-स्विंग आज़ादी दी..

आज लाइफ के..
जिस क्रॉसरोड ने..
बेहिसाब तन्हाई के मटेरियल दिए..
तुमने सिर्फ़ साथ रहने का..
कमिटमैन्ट ऑफलोड किया..

हाँ..
आई एक्सेप्ट दिस ट्रूथ..
यू हैव बीन माय फर्स्ट लव..

और..हाँ..
तुम ही रहोगे..
ता-उम्र..
जिसे देख मेरी हार्टबीट स्किप हो..
मेरे प्यारे..
माइन..जस्ट माइन..
शरद के चाँद..<3!!"

...

--रोमांस की एक कथा..चाँदनी की रज़ा..

Sunday, June 4, 2017

'जाड़े की दस्तक..'




...

"जाड़े की दस्तक से ही आया था..
प्यार तुम्हारा..
इस बरस पूरे हो जाएँगे..
6 बसंत..6 ज्येष्ठ..6 सावन..और 6 कार्तिक..
हाँ, तब ही मिले थे तुम..

जुदाई-मिलन की कशिश से बंधे..
तुम-हम..
थिक्स-थिंस..से ग्रो होते..
हम-तुम..
रतजगे-अर्ली मोर्निंगज़..से रिफ्रेश होते..
तुम-हम..
ह्यूमिड दोपहर-मेस्मेराइज़िंग शाम..से फ्लोट होते..
हम-तुम..

औ..
इक शब..
तुम्हें लाइव देखना..जी भर..
दो मिनट की डैडलाइन का..
ग्यारह मिनट चौबीस सैकंड होना..

#जां..
आपका होना..
मेरा होना है..!!"

...

--#जां, मुबारक़..गिरफ़्त बाँहों-बोसों की..औ' तुम-हम..

Sunday, April 2, 2017

'मैत्री की गोष्ठी..'






#प्रेमराग

...

"तेरी-मेरी द्विपक्षीय वार्ता की महत्वपूर्ण नीति..

विकल्प चुन सकूँ..
ऐसी असाधारण कूटनीति कहाँ से लाऊँ..

संबंध प्रगाढ़ कर सकूँ..
ऐसी ज़मीनी गूढ़ता कहाँ से लाऊँ..

प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समझौता..
ऐसी गरमजोशी कहाँ से लाऊँ..

मुद्दे ज्ञापित कर सकूँ..
ऐसा प्रचारक कहाँ से लाऊँ..

वैचारिक मतभेद में भी कड़ी निजता..
अंततः दस्तावेज पर अंकित..
तुम्हारे-मेरे हस्ताक्षर..!!"

...

--मैत्री की गोष्ठी और समय का आँकड़ा..

Tuesday, September 27, 2016

'मिस कॉल की गाँठ..'






#जां

...

"मेरे जीवन के उपन्यास का कलेवर..

पृष्ठ संख्या ११६ पे अंकित..
वो सुनहरा पैगाम..

दृष्टिगत होती..
तुम्हारी नज़र..
खिलता-महकता..
'दिल धड़कने का सबब'..

यूँ तो पाँच साल..
और यूँ पूरी उम्र..

इक पल का सुकूं..
दूजे पे कसक..

पल-पल मुझे संवारना..
रेज़ा-रेज़ा दुलारना..
प्रेम के रूप हैं बहुत..

रोज़ माँगना..
इक गिरफ़्त..
रोज़ हारना..
ज़ालिम हुड़क..

कहो, कितने लफ्ज़ सजाऊँ..
सूती चादर के अलाव..
कितने 'लव-लैटर्स' करेंगे..
फ़ैसले पे बचाव..

३० दिन..१० लफ्ज़..
कुल जोड़ -- ३००..
पूरी हो..इस दफ़ा..
ये मुराद..

रातों के मोती..
मिस कॉल की गाँठ..
रोशन तुमसे..
मेरा दहकता ख्व़ाब..

मेरी अल्हड़ आवारगी..
तेरी कट्टर 'ना'..
आलिंगन..बोसे..
औ' वो बेबस रात..

मेरे केस की सुनवाई..
तेरी ही अदालत में..
मेरे ब्यान..
तेरी ही हिफाज़त में..!!"

...

--डिमांड शुड बी इक्यूअल टू सप्लाई.. <3 = <3 है न, #जां..

Monday, September 26, 2016

'जिस्म..मुहब्बत वाला..'






...

"दिनभर की भाग-दौड़ में..
उग आते हैं..
नाराज़गी के छोटे-छोटे फ़ाये..

बनते-बिगड़ते काम में..
झुलस जाते हैं..
मासूमियत के प्यारे साये..

छल-कपट के शोर में..
ठिठक जाते हैं..
हँसी के अल्हड़ पाये..

ओढ़ लेती है शब..
थक-हार के चादर..
मैं निकलता हूँ..
अपने जिस्म से..
तेरी रूह तक..

दूसरे प्रहर के ताने-बाने..
वो स्पेशल रतजगे..
तैरते सहर तक..
फ़िर पहन लेता हूँ..
जिस्म..मुहब्बत वाला..

बाँध कमीज़ पर..
निकल जाता हूँ..
उसी भाग-दौड़ में..
हवाले तुम्हारे जिस्म अपना..!!"

...

Monday, May 16, 2016

'मीठे एहसास'..




#जां
...


"सुना है..
तुम 'लव-गुरु' हो..

पल में ही लोगों की मुश्किलें हर देते हो..

कोई ब्रेक-अप हो..
या..
हो इश्क़ में मोराल डाउन..

कोई टीनएजर हो..
या..
मिड २०ज़ के डिलेमा वाला..

कोई अधेड़ तलाशता हो साथी नया..
या..
कोई अपने बिछड़े बीलवेड की यादें संजोता..

सबको कम्फर्ट करते-करते..
अपने एहसास भूल गये..शायद..

रूह के छोर पे..
देखो..उग आये हैं..
कितने स्याह जामुन..

आओ न..#जां..
मैं चखकर देती हूँ..
वो 'मीठे एहसास'..
के ज़बां पे आने दो..

मेरे रस की बूँदें..
मेरी उल्फ़त के निशां..

दिन भर दुनिया से छुपा..
घूमते रहना..चाहे जहाँ..!!"

...

--गाढ़े रंग..मुहब्बत वाले..


Thursday, April 7, 2016

'अक्षरों के पल्लवन..'




...

"स्मृति-पटल पर..
पोषित अंतर्मन पर..
ओष्ट-धरा पर..
नेत्र-द्वार पर..

अक्षरों के पल्लवन..
स्नेह के प्याले..

गति का मान..
लय का श्रम..
लक्ष्य का भान..

संबंधों के स्वास्थ्य..
माधुर्य से परिपूर्ण रहें..
क्षण-क्षण..
प्रति क्षण..

आभार..मेरे ‪#‎जां‬..!!"

...

--स्पर्श-चिकित्सा का नया अध्याय..heart emoticon आज स्वास्थ्य-दिवस है..#जां..

'इस साल की दुआ..'






‪#‎जां‬

...

"कुछ रिश्तों की नींव..
बिन मिले ही गहरा जाती है..
प्रत्यक्ष की चाह भी..
लोप हो जाती है..

कुछ पल गहरा जाते हैं..
मिलन की आस..
अधूरी..अधपकी..वहशत..
जीने की प्यास..

#जां..
मेरी रूह पे निशां गहरा रहे हैं..
जाने क्यूँ..तुम्हें ही पुकार रहे..

इस साल की दुआ..
अगले मौसम में खिले..

चाहत की दूरी..
होठों से मिले..

तुम लिख भेजना..
मेरा ड्यू लैटर..
पढ़ जिसे पी लूँगी..
जुदाई का चैप्टर..

बिन मिले..
जुदा कैसे हुए..
बिन मिले..
एक कैसे हुए..!!"

...

--दर्द..जाने कैसे-कैसे..

Monday, March 28, 2016

'क़ातिल आशिक़..'






...

"हाथ की लकीरों पे..
खुदा इक नाम था..
जाने ता-उम्र तलाश को..
आया कैसे आराम था..

तुम आये थे क़रीब..
इतना ज़्यादा..
निहारता-संवारता चला..
किस्मत का प्यादा..

नुमाइश-ए-ज़िन्दगी..
गुमनाम आवारा-सा मैं..
फ़लसफ़ा मिला ऐसा..
क़ातिल आशिक़-सा मैं..

आगोश गहराओ..
जलाओ..के बुझाओ..
चिंगारी सुलगाओ..
आओ..और क़रीब आओ..!!"

...

--रंग-ए-बिसात-ए-इश्क़..

Monday, February 29, 2016

'वीकैंड-ख़ुमार..'


...

"मेरे जानेमन..
तेरी हर अदा पे प्यार आता है..
ख़ता पे अपनी ख़ुमार आता है..

साथ को तड़पता हर पल..देखिये..
उनका जवाब एक बार आता है..

मसरूफ़ जानेमन..सुबहो-शाम..
आपको भी हमारा ख्याल आता है..

चलो न..ख़त्म करें ये फ़ासले..
वीकैंड-ख़ुमार बेशुमार आता है..

कस गिरफ़्त..लिपट जायें..
पैग़ाम रूह से ये ही आता है..!!"

...

Monday, November 30, 2015

'मुहब्बत वाला हग़..'




...

"दरार जिस्म पे थी..या..रूह की डाली यूँ ही विचलित हुई.. कुछ रिश्तों में साँसें ही साक्ष्य देतीं हैं.. अनगिनत रातों की स्याही..ग़म के रंग कैनवास पर छेड़तीं हैं..राग भैरवी..

'मैं' समेटती आवारगी वाले हिसाब..स्पर्श की सुगंध से सराबोर मुहब्बत वाला हग़..और मेरा सफ़ेद लिबास..!!"

...


--कुछ बेहिसाब-से खाते..

'रूह का हरा..'






...

"मेरे मन का पीला..
औ' तेरी रूह का हरा..

बहुत सताता है..
दूरियों का ज़खीरा..

मिलो किसी शब..
ग़म पिघल जाएँ..

साँसों में घुले..
मुहब्बत कतरा-कतरा..!!"

...

'गिलाफ़ देह वाले..'




...

"पल-पल संवरते..
कुछ आबाद लम्हें..
शबनमी साँसें..
रूहानी रूह..

नमकीं सौगात..
शब-भर..
रेशमी बाँहें..

दिन भर वो ज़ालिम हैंगओवर..
इतिहास मानिंद हमारा भूगोल..

तह खोलता-बांधता..
मौसम का राग..

गिलाफ़ देह वाले..
उतार दें..
चल आज..!!"

...

'तुम्हारा मरून..'




...

"मुझे भाता है..
तुम्हारा मरून..

वो बिंदास हँसी..
वो खनकती आवाज़..
वो मुझसे हर सवाल को बार-बार पूछना..
वो..हर बार कहना..
'क्या कहूँ..तुम्हें सब पता है'..

और हाँ..

वो एक सिंपल 'हग़'..

मुश्किलों के दौर में..
आज़ादी के छोर में..
रूह का ठिकाना 'वो' ही रहेगा..!!"

...

--एहसास प्यार वाले..

'प्यार वाले किस्से..'





...

"तुम उल्फ़त लिखतीं..
मैं दर्द..

तुम सुकूं लिखतीं..
मैं अश्क़..

तुम बेबाक़ी लिखतीं..
मैं वहशत..

तुम पोर लिखतीं..
मैं नासूर..

तुम ज़िन्दगी लिखतीं..
मैं ‪#‎जां‬..!!"

...

--प्यार वाले किस्से.

Saturday, November 28, 2015

'एहसासों का एहसान..'





#‎जां‬

...

"कितना कुछ था कहने को..
इस धूप-छाँव के खेल में..

वो लंबे 'पौज़ेज़'..
वो तुम्हारी साँसों का दख़ल..
मेरी रूह का 'फ़ूड फॉर थॉट'..

वो तनहा रातों पे..
कब्ज़ा तुम्हारा..

उन बेशुमार एहसासों का एहसान..
शुक्रिया कहूँ तो..
'कोई एहसान नहीं किया..मैंने'..

कैसे करते हो..
सब कुछ मैनेज..
मेरे लिए तो..
हर वक़्त अवेलेबल..

सुना है..
रिलायंस का नया ऑफर..
'अनलिमिटेड कालिंग' दे रहा है..
ले लूँ फ़िर..
ये कभी न थमने वाला गैजेट..

मेरे दिल से तेरे दिल के..
नाते कुछ पुराने हैं..
डिस्टेंस से कम न हुए..
मोहब्बत के फ़साने हैं..!!"

...

--एहसास प्यार वाले..

Tuesday, November 17, 2015

'तड़पते एहसास..'








...

"साज़िशों की देह..
कुछ सीक्रेट्स की फ़तेह

बिरही राग होंठ लगे..
कुछ तनहा रतजगे..

अंतस की कलाई..
कुछ नमक-ए-वफ़ाई..

चाँद की तन्हाई..
कोई ग़मगीन रुबाई..

उदासी के ज़ज़ीरे..
कुछ सुर्ख लकीरें..

एडजस्टमैंट का सुरूर..
उजले दिन का गुरूर..

तड़पते एहसास..
कच्चे टुकड़े..आत्मा वाले..!!"

...

--तपती रही..साल भर..तुम लरजते रहे..

'रतजगे नशीले-से..'





‪#‎जां‬

...

"तेरे आने-जाने में सदियाँ थम गयीं..
तेरी लकीर से मेरी तक़दीर बदल गयी..

वो कौनसा जाम था..
जो नर्म किरचों से झांकता है..

रतजगे नशीले-से..
बेसुध साँसें..
ख़ुमारी अपने पंख पसारती..
उतर आई है..
बहुत गहरी..

ज़रा..
नज़र उतार दो..
इन सूखे होठों की..
हाँ..
तुम्हारे सुर्ख दस्तावेज़ों से..
लपेट दो न..
बोसों के गिलाफ़..

अंतस की तस्में..
हरी हो चलीं..
औ' मैं तलाशता..
निषेद्ध अलाव.!!"

...

--कितने कच्चे रंग पकते..ज़ालिम #जां की गली..