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Sunday, June 29, 2014

'उत्सव..'







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"स्नेह की गाढ़ी चाशनी में पका..
मतभेद की सिगड़ी पर..

अपनत्व की मरहम..
और प्रेम की बौछार..

विश्वास का अनंत सागर..
आकाशगंगा-सा घनत्व..

सूत-सा आरामदायी..
फौलाद-सा निष्ठावान..

तुम्हारी मित्रता का..
ये लाल धागा..
मेरी कलाई को संवारता रहेगा..
हर उत्सव में..!!"

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--मेरे घनिष्ठ मित्र..तुम मेरे जीवन का अभिन्न अंग हो.. <3 <3

Monday, June 2, 2014

'दोस्त तो जीवन हैं..'



#दोस्त #जिंदगी #जां

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"दोस्त तो जीवन हैं..

हिम पर बर्फ जैसा..साँसों में धुआँ भर..इरादों में फ़ौलाद डालता हुआ..
बारिश में गले लगा..साथ में अपना मन रीतता हुआ..
समंदर किनारे रेत-सा ठंडा और बेहद अपना..मेरा अपना चित्र बनाने की परमिशन देता हुआ..!!!"

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--प्रेरणास्तोत्र..एक दोस्त..जो समझे नहीं कि हम ही द बैस्ट हैं..

Friday, October 21, 2011

'राज़-ए-दिल..'





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"राज़-ए-दिल जाने ना कोई..
हम-ज़लीस पहचाने ना कोई..!!"


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Monday, September 12, 2011

'एहसां..'



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"हासिल..
मोहब्बत-ए-दयार..
एहसां ता-उम्र..
ए हम-ज़लीस..!!!"


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Wednesday, September 7, 2011

'शुक्रिया..'



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"दुआ से तेरी..
खिल रहा हूँ..
इतर से तेरी..
महक रहा हूँ..
वफ़ा से तेरी..
भीग रहा हूँ..
नज़रों से तेरी..
रंग रहा हूँ..

शुक्रिया..
ए हम-ज़लीस..!!!"

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Thursday, February 17, 2011

'अचूक उपचार है..'




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"जीवन की सरगम..
चमक खो रहीं हैं..

स्वयं का प्रतिबिम्ब..
सुगंध बेच रहा है..

तनिक..
समीप बैठ..
ह्रदय-चाप सुनो..

घायल सैनिक-सा..
मनोबल हो रहा है..

दुर्लभ संबल..
मापदंड बुझा रहा है..

एकाकी का बाण..
लहूलुहान कर रहा है..

वाणी से निर्बलता..
मिटा जाओ..

सींच दो..
अंतर्मन का उपवन..

ए-मित्र..
अचूक उपचार है..
स्पर्श तुम्हारा..!!"


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Saturday, November 13, 2010

'रूहानी रूह..'


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"एक जाल बुना था..
इर्द-गिर्द..
कुछ रूहानी रूह..
कूचा बसा गए..
जाम-ए-सुकूत..
छलका गए..
गहरा गए हो..
ज़मीं के आसमां पे..
फ़क़त..
भूला गए..
वजूद..!!"


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Monday, November 1, 2010

'तुमसे हैं.. निशां..'

समर्पित है..हमारे परम-प्रिय मित्र को..

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"उठे हैं..
लाखों सवाल..
चले हैं खंज़र..
हुआ है मलाल..
बेकाबू धड़कन..
आँखें नम..
ग़मगीन नज़ारे..
निकला है दम..

गुमगश्ता था..
संवारा तुमने..
बेसहारा था..
संभाला तुमने..

बरसे गर..
बादल-ए-नाउमीदी..
रेज़ा-रेज़ा..
होगा..
आशियाना-ए-रूह..

तुमसे हैं..
रौशन..
तुमसे हैं..
साँसें..
तुमसे हैं..
*आब-ए-बका-ए-दवाम..
तुमसे हैं..
#सुर्खी-ए-गुलशन..
तुमसे हैं..
निशां..!!"


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* आब-ए-बका-ए-दवाम = अंतहीन जीवन../Nectar that gives eternal life..
# सुर्खी-ए-गुलशन = बगीचे में फैले सुर्ख लाल रंग..

Wednesday, October 20, 2010

'समर्पित है जीवन..'




हमारे परम-प्रिय मित्र को समर्पित, जिन्होंने हमारे जीवन को एक नयी दिशा..पहचान दी है..!!



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"सुरभित है जीवन तुमसे..
सुरम्य है जीवन तुमसे..
सम्पूर्ण है जीवन तुमसे..
सुशोभित है जीवन तुमसे..

सलंग है मिठास तुमसे..
सदैव है मिठास तुमसे..
सुकोमल है मिठास तुमसे..
शीतल है मिठास तुमसे..

सुवर्ण है वाणी तुमसे..
सुसंस्कृत है वाणी तुमसे..
सभ्य है वाणी तुमसे..
संवरीं है वाणी तुमसे..

सानिध्य मिला है तुमसे..
संबल मिला है तुमसे..
संसार मिला है तुमसे..
सार मिला है तुमसे..

समर्पित है..
सादगी में समायी..
सु-संगती की..
सारी श्रृंखला..!!"


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Thursday, December 24, 2009

हम-ज़लीस..



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"पहली सोच..
आखिरी पड़ाव..

अनमोल..
तहखाना..

ख़जाना..
सौगात..

तस्वीर..
रूह..

इबादत..
ईमान..

अक्स-ए-ज़िन्दगी..
खुशबू का बिछौना..

हम-ज़लीस..
तेरा शुक्रिया..!"

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