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Tuesday, December 25, 2012

'आफ़ताब..'





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"आयेगा ज़मीन पे चाँद..
खिलेगा आफ़ताब सारी रात..

आँगन खिला है..टेसुओं से..!!"

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Tuesday, December 18, 2012

'सबब..'







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"कच्चा-पक्का सवाल मेरा..
पक्का-सा जवाब तेरा..

कहाँ हासिल सबब अब कोई..!!!"


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Tuesday, September 18, 2012

'तनहा..'




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"ग़मज़दा..
गुमशुदा..

तनहा..!!!"

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Thursday, August 30, 2012

'होली..'




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"बाँध सांसारिक-बंधन की डोरी..
भूल गयी भूत आँख-मिचौली..

क्यूँ खेली गयी ये झूठी होली..!!"

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Wednesday, August 8, 2012

'जज़्बात..'

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"इक हसीं सौगात..
ज़ख्म बेहिसाब..

बिखरे जज़्बात..!!"

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Wednesday, July 25, 2012

'महँगाई..'




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"कुछ मकां घर नहीं हो पाते..
कुछ रिश्ते शादाब नहीं हो पाते..

महँगाई ने चूल्हे की साँस तोड़ दी..!!"

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Thursday, March 29, 2012

'इंतज़ार..'

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"तौहफा-ए-बोसा..
पैगाम-ए-मोहब्बत..

बैठी हूँ..इंतज़ार में..!!"



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Thursday, December 22, 2011

'हकीकत-ए-शबाब..'




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"चमकते जिस्म..
बहकते ख्वाब..

हकीकत-ए-शबाब..!!!"

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Friday, October 14, 2011

'बेखुदी..'




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"रेज़ा-रेज़ा रूह..
कतरा-कतरा काविशें..

बस्ती-बस्ती बेखुदी..!!!"


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Saturday, September 17, 2011

'बेजुबां अल्फ़ाज़..'




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"रवां-रवां..ज़िन्दगानी..

रेज़ा-रेज़ा..जवानी..



बेजुबां अल्फ़ाज़..तन्हा-तन्हा..!!"



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Wednesday, August 24, 2011

'आँखें..'




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"हर नफ्ज़ लुभाती आँखें..
रूह से पर्दा उठाती आँखें..

ता-उम्र..तन्हा ही रहीं आँखें..!!"

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Tuesday, August 23, 2011

'चाँद..'



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"हसीं रातों के साये..
रेशमी जुल्फों के पाये..

शर्माता रहा..अपने आँगन..!"

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Monday, August 22, 2011

'खलिश..'




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"चाँद सिफारिश करे तो क्या..
वादियाँ वजूद बिखेरे तो क्या..

काँटों की खलिश..कोई कैसे जाने..!!!"

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Wednesday, August 17, 2011

'फ़साना..'




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"तन्हाई की कद्र जाने ना कोई..
लुटा जब-जब पहने हिजाब कई..

क्या समझेगा मेरा फ़साना कोई..!!"

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Saturday, June 18, 2011

'निस्बत..'


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"दुआओं पर चलो चादर चढ़ाते हैं..
वफाओं पर चलो लुटाते हैं..

मुमकिन कहाँ जज्बातों का आशियाना..!!!"


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Thursday, June 16, 2011

'खुशियों की छतरी..'




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"दीवानगी-ए-सनम..जग जाहिर..
संगदिल वफ़ा..यार माहिर..

महंगी है..खुशियों की छतरी..!!!"


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Wednesday, April 27, 2011

'क़त्ल..'



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"खूबसूरत अंदाज़..
बेबाक़ जज़्बात..

क़त्ल हुए..तेरे कूचे..!!"


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Friday, April 1, 2011

'जंग-ए-रूह..'


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"बिखरती शब..
सुलगती नब्ज़..

आह..जंग-ए-रूह..!!"


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Thursday, March 10, 2011

'जीने की तलब..'



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"ज़ज्बातों की आँधी से उलझता हूँ..
काफिला साथ..हर शब मचलता हूँ...

जीने की तलब..बेरंग हो चली है..!!"

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Thursday, March 3, 2011

'दर-ए-यार..'





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"कितने मेहरबां मिले..
कितने गुलिस्तान खिले..

दर-ए-यार..तन्हा-तन्हा..!!!"


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