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Thursday, April 30, 2015

'पुर्ज़ों की स्याही..'




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"इक पता तलाशता हूँ..अपनी ज़मीं से दूर..
इक आह संभालता हूँ..अपने जिस्म से दूर..
इक संदर्भ खंगालता हूँ..अपनी जिरह से दूर..

पुर्ज़ों की स्याही..विस्मित-सी..करे अनंत सवाल..!!"

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Thursday, April 9, 2015

'प्यार है..जानिब..'



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"कितनी आसानी से..
इल्ज़ाम दे गया..

बेइन्तिहाँ मोहब्बत थी..
ज़फ़ा दे गया..

सौदागर-ए-वहशत हूँ..
वीरानी का ओवरलोडेड स्टॉक..
मुझ पर ही लुटाता है..

सुट्टा जिंदगी का..
दिलबर के साथ..
राख़ मेरी ऐश-ट्रे में भर जाता है..

लेट नाईट टॉक्स उनकी..
हैंगओवर का फ्रसटेशन..
ब्रेकफास्ट में मुझे दे जाता है..

मैसेज सारे उनके नाम..
मेरा पत्र बरसों एड्रेस को तरस जाता है..

रूह के रेशे में लिपटे तोहफ़े मेरे..
क्रेडिट तो..यार के खाते में जाता है..

प्यार है..जानिब..
आख़िरी कश तक जलाएगा..

फाल्ट इज़ यौर्ज़..बेबी..
तू क्यूँ अपनी 'अवेलेबिलिटी' दिखा जाता है..

चिल्लैकस स्वीटी..
'दिस इज़ व्हाट लव इज़ आल अबाउट'..!!"

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--गुरु का ज्ञान..wink emoticon

Monday, October 13, 2014

'शुक्रगुज़ार हूँ..'






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"कितनों को देते हैं आप..दिशा..
कभी थकी-हारी जो आती हूँ..
फैला देते हैं..आँचल वात्सल्य-भरा..

अब जो कहूँगी..
'शुक्रगुज़ार हूँ..'
नाराज़ हो जायेंगे..

कहाँ किसी को यूँ ही कह पाते हैं..राज़ अपने..
जाने कैसे बंध जाते हैं..रिश्तों से सपने..

मेरी खुरदुरी लकीरों को..
कोमल स्वरों से सहलाते हैं..
बस चलते रहना का ही..
दम भराते जाते हैं..

निशब्द हूँ..
यूँ ही रहना चाहती हूँ..
आज फिर..
तेरे आँचल में सोना चाहती हूँ..!!"

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Tuesday, March 18, 2014

'हैसियत की जिल्द..'





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"ख़ुद पे ही हँसता हूँ..
ख़ुद पे ही रोता हूँ..

जी भर जब लिखता हूँ..
ज़ख्मों को पीता हूँ..

स्याह रंग डालता हूँ..
वज़ूद के पन्ने पे..
माकूल तस्वीर पाता हूँ..

बंद रस्ते..खाली मकां..
रिश्तों की साँस..
खाली दीवार पे ढूँढता हूँ..

न कर मुझे पाने की ख्वाहिश..
हर शब जीता..हर सहर मरता हूँ..

होंगे दीवाने..हबीब बेशुमार..
रूह पे हैसियत की जिल्द रखता हूँ..!!"

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Monday, March 3, 2014

'अरमान..'





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"काश..ये मुमकिन हो जाए..
वो मुझे 'मुझसा' देख जाए..

कहाँ होते हैं अरमान पूरे..
ख्वाहिश जो निखर जाए..!!!"

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Friday, February 28, 2014

'रुसवा..'






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"अजीब कशिश साँसों की..
महके तो चहके तन-मन..
रुसवा तो दहके तन-मन..!!"

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--बस यूँ ही..

Thursday, January 30, 2014

'तैरता तेरा नाम..'





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"तेरा नाम भी अज़ब मादकता का बोध कराता है.. मोबाईल की टच स्क्रीन पर तैरता तेरा नाम..जैसे छुआ है तुझे अभी-अभी..!!"

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--जाने वस्ल-ए-रात कब आएगी..

Tuesday, January 28, 2014

'सव्वाली ही रहा..'











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"कैसी तलब थी.. कुछ न समझ सका..
आवारा था..आवारा ही रहा..

हँसी-खेल में मिटाता रहा जज़्बात सारे..
तनहा था..तनहा ही रहा..

बहर..रदीफ़..मतला..
सब खफ़ा हैं..
हर शे'र अधूरा था..अधूरा ही रहा..

बेरुख़ी इक तेरी सह न सका..
जुदा हुआ कैसे तेरी रूह से..
जो हुआ जुदा..जुदा ही रहा..

उम्मीदें बेवज़ह साहिल पे तैरतीं..
गहराई नापता मैं..
नादां था..नादां ही रहा..

बेइंतिहां मोहब्बत है तुझसे..
'जां'..
सव्वाली था..सव्वाली ही रहा..

न भरना बाँहों में कभी..
बर्बाद था..बर्बाद ही रहा..!!"

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--काश तुम सुनते..वो जो मैंने कभी कहा ही नहीं..

Saturday, June 29, 2013

'तुम्हारी हर शै..'





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"तुम्हारी हर शै..
रूह में..
यूँ बसी..

लैपटॉप..मोबाइल..किताबें..
कार..स्टीरियो..आई-पॉड..
बिस्तर..चादर..सिलवटें..
सहर..दोपहर..शब..
तन्हाई..वीरानी..वहशत..

फ़क़त..
इस जहां..
उस जहां..
इक तू ही तू..!!"

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Sunday, February 3, 2013

'ए-मेहरबां..'





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"प्यार ना कर मुझसे..ए-मेहरबां..
जो बिखरी..बहुत तड़पाऊँगी..
जलूँगी हर नफ्ज़..रेज़ा-रेज़ा..
छालों से..शोले सजाऊँगी..!!"

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Saturday, January 19, 2013

'नीम..'




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"चलो..
तोड़ लायें..
चमकीले तारे..
महताब के आँगन से..
तलाशता आयेगा, देखना..
नीम की मदमस्त मीठी बाँहों तक..!!"

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Wednesday, January 16, 2013

'अश्क..'




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"क्या ढूँढ रही है मेरी नज़र..
क्या चाहती है रूह मेरी..
क्यूँ धुंधली है हर राह..
क्यूँ प्यासा लगता है हर दरिया..
क्यूँ तड़प इतनी है..
क्यूँ ये तलब मिटती नहीं..
क्यूँ अश्क थमते नहीं..
क्यूँ अब्र-ए-चश्म जलते नहीं..

बस भी करो..
थक गयी हूँ..
अब..!!"


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Wednesday, December 12, 2012

'अशआर..'




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"हीरा..पन्ना..माणक..
अज़ीज़ बेशुमार..

ना भूला सका..
ना सुलगे अशआर..!!!"

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Saturday, October 6, 2012

'लम्हे..'


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"सफ़र में मिले कुछ अजनबी..
चंद लम्हे देकर..
सौदा-ए-रूह किया..!!!"


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Monday, September 24, 2012

'वजूद-ए-लहर..'



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"काश..
बँध सकते..
रेत पे साहिल के घरोंदे..

पड़ता है टूटना..
हर पल..

फ़क़त..
बचाने..
वजूद-ए-लहर..!!"

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Saturday, September 22, 2012

'नसीब..'

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"यूँ लगता है..
खो गयी..
एक बार फिर..

टूट गयी..
बन सितारा..
एक बार फिर..

दुआ ये ही अता हुई हो..
शायद..
नसीब मेरे..!!"

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Friday, August 31, 2012

'कुछ ख्वाब..'





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"हर पल..सपना-सा था..
रूह में बसा..अपना-सा था..

कारवाँ इक..चलता रहा..
एहसास इक..पलता रहा..

रंज-ओ-गम..जमता रहा..
एह-दे-वफ़ा..रमता रहा..

अहमियत फिसलती रही..
बेबसी मचलती रही..

अँधेरा चमकता रहा..
रकीब दमकता रहा..

सिलवटें उलझी रहीं..
रिवायतें झुलसी रहीं..

लम्हे जलते रहे..
पैमाने मलते रहे..


कुछ ख्वाब..

गुड-से तीखे..
नासूर बंजारे-से..!"

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Thursday, August 23, 2012

'रंग..'






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"चाहत का तेरी..
रंग झड़ता नहीं..
मिटाऊं कितना..
ये धुलता नहीं..
कशिश ऐसी..
बढ़ती जाये..
चमक ऐसी..
चढ़ती जाये..
आओ..
गढ़ दो..
सिरे..
फिर से..
पहन तुझको..
हर शब..
खिल जाऊं..!!"

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Thursday, August 9, 2012

'वक़्त..'




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"जैसे ही दीवार-घड़ी में आठ बजे तुम याद आये..!!! वक़्त भी ना कितना अजीब है..जब ढेर सारा वक़्त था, तब भी वक़्त नहीं था.. और जब आज वक़्त नहीं है तो बरबस चाहती हूँ काश सारा वक़्त समेट लूँ, थाम लूँ वक़्त की सुईयां और खींच लाऊं तुम्हें फिर से करीब अपने..!!!

पर तुम..अक्सर दुनियादारी में ही उलझे रहते हो..मेरा ख्याल भी तुम्हारे ख्याल में नहीं आता कि कोई तुम्हारे बिना कितना अधूरा अकेला होगा..!!!! बहुत वक़्त गुज़र गया..अब आ भी जाओ ना..कि रात के सारे पहर तुम बिन बेवक्त मुझे चिढ़ाते हैं..!!! बहुत तनहा हूँ, आओ ना..बेवक्त बाँध दो फिर से इस वक़्त की डोरी..!!"


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Thursday, July 12, 2012

'अजीब-सा चन्द्र..'





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"हथेली पर तुम्हारे..
अजीब-सा चन्द्र..
शीतलता की बजाय..
देह में मेरी..
भर देता है गर्माहट..

क्यूँ अक्सर..
ह्रदय की धमनी..
बदल देती है..
नियति..
और
पलायन होता है..
'नीच' से 'उच्च' की ओर..!!"

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