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Wednesday, December 1, 2010

'सुख-दुःख की चमचम..'



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"थक कर..हार कर..थाम लूँ कदम..
मुश्किल है..संभालना मेरा दमखम..
रखता हूँ..शौर्य..बल..साहस..करुणा..
व्यर्थ है फैलाना..सुख-दुःख की चमचम..!!"


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Friday, November 26, 2010

'लिहाफ़ के दरख्त..'



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"लिहाफ़ के दरख्त पर खुदा था..
रूह की ज़मीं पर सजा था..
सुर्ख आहों पर..मेरे महबूब की..
अदाओं का नगीना जड़ा था..!!"


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Sunday, November 21, 2010

'एहसासों का दरख्त..'


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"साँसों में मह्फूस रहा था..जो कभी..
जुस्तजू से आबाद बहा था..जो कभी..
तंग हो गयीं हैं एहसासों की दरख्त..
सच ही है..माज़ी ने कहा था जो कभी..!"


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