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Sunday, February 10, 2019

'मेरे हौसलें..'






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"थक चुके होंगे तो बैठ जाएँगे..
मेरे हौसलें मेरे बिन, कहाँ जाएँगे..!!"

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Sunday, December 31, 2017

'मोटिवेशनल धक्के..'





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"चाहत ज़िन्दगी से रखना बहुत, दोस्तों.. लिहाफ़ में इसके काँटों में लिपटे फूल मिलेंगे.. मेरी उँगलियों के पोर जब-जब भी इन काँटों से सराबोर हुए, एक टीस तो उठी ही.. तो क्या हुआ जो पाया नहीं मुकाम अब तक, थका नहीं तो रुक कैसे जाऊँ..

वैसे, मन थक जाये तो देह की स्फूर्ति भी किस काम की??

'चलते जाना ही ध्येय है', मेरा.... ज़िंदगी और लोग डिमांडिंग ही रहेंगे, जानती हूँ.. पर मन का टैम्परेचर ही डिसाइडिंग फैक्टर होता है.. गो फ़ॉर इट, ए-खानाबदोश..

मंज़िल कॉलिंग!"

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--#मोटिवेशनल धक्के..

Tuesday, April 12, 2016

'चलना ही ध्येय हो..'





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"चलते चल, पथिक..
डगर का अस्तित्व..
तुझसे ही होगा..

बाँधते चल, नाविक..
लहर का सत्त्व..
तुझसे ही होगा..

संवारते चल, चितेरे..
महल का तत्व..
तुझसे ही होगा..

ढालते चल, विद्यार्थी..
पहल का रक्त..
तुझसे ही होगा..!!"

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--चलना ही ध्येय हो..प्रतिक्षण..

Saturday, August 29, 2015

'सफ़लता-मंत्र..'






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"कम होने लगे..
शब्दों से संबंध..

तंज़ होने लगे..
जीवन के बंध..

चलते रहना..
रस्ते हों चंद..

पुकारे मंज़िल..
ख़ुमारी मंद-मंद..

गतिशीलता..निरंतरता..
सफ़लता-मंत्र..!!"

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--चलते रहना..ए-पथिक..

Friday, July 31, 2015

'लक्ष्य की शान..'





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"आज चलता हूँ..
जब थक-हार के बैठने के बाद..

एक स्फूर्ति है..
जो देती है साथ..

पग-पग निहारता रहूँ..
लक्ष्य की शान..

रग-रग संवारता रहूँ..
जीवन का ज्ञान..!!"

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Sunday, June 15, 2014

'रिक्त बीज..'







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"सारे प्रयत्न विफल हुए..आषाढ़ की तीज पर..
कितने तरुवर लील हुए..एक रिक्त बीज पर..!!!"

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--अपनी आग को ज़िंदा रखना..

Thursday, March 6, 2014

'फीनिक्स..'




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"इक तेरा राख से उठना..
आकाश पा लेना..लुटा..
ख़ुद को राख बना लेना..

फीनिक्स-सा जिस्म..
आग-सी रूह..
तूफ़ानी मंज़र..
मेरी जुस्तजू..!!"

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Saturday, February 22, 2014

'मधुर ताल..'








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"जीवन की राह पर चलना होगा..
संकट आयें गहरे..सधना होगा..१..

दुःख न करना..ए-पथिक..
उजास ह्रदय में भरना होगा..२..

वरदान संभव..मज़बूत इरादे..
अध्याय तिमिर का हरना होगा..३..

संघर्ष बजाये बांसुरी-राग ऊँची..
मधुर ताल अंतस बसना होगा..४..

समाधि-वरण विरक्त ध्येय..
सरल-तरल नैय्या तरना होगा..५..!!"

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Wednesday, April 24, 2013

'रत्न ..'



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"मुश्किल अवश्य है प्रश्न..
पर कुछ तो होगा हल..
चलिए, आप और मैं ढूँढें..
कोई रत्न हो बैठा थल..!!"

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Thursday, February 28, 2013

'विजयी-पताका..'




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"बाँध तस्में चल पड़ी..
जीवन-डगर पर अकेली..
कोई संगी-साथी नहीं...
जीवन दुर्लभ पहेली..

कठिन हो लक्ष्य..
दुर्गम हो राहें..
साधना ही होगा..
कर विसर्जित आहें..

समय अल्प बचा है..
लक्ष्य दूर खड़ा है..
थकना रुकना अब नहीं..
कार्य बहुत पड़ा है..

परिश्रम, धैर्य, लगन..
पिरो ह्रदय-धरातल पर..
विजयी-पताका सुन्दर..
लहरायेंगे आकाश-थल पर..!!"

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Monday, December 31, 2012

'उठ नादां..'




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"पहचां मुश्किल..
मुलाकात मुश्किल..
वहशत अपनी..
दुनिया ग़ैर..
भूला सबको..
पा ख़ुदको..
उठ नादां..
भर ताकत..
तुझसे बेहतर..
कोई नहीं..!!"

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Sunday, December 30, 2012

'जवाब..'






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"क्यूँ ढूँढें जवाब दुनिया में..
छिपा हो ख़ुदा जब ख़ुद में..!!"


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Friday, September 21, 2012

'आकाश ..'

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"विषम परिस्थिति क्या गिरायेगी मनोबल मेरा..
रख दूँ कदम हौसला-भर, वो ही आकाश मेरा..!!"


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Wednesday, September 12, 2012

'ए-पथिक..'




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"सूर्य-किरण से बहता..
अनंत प्रताप..
झर-झर झरो..
बलशाली अनुताप..


उठो..ए-पथिक..
त्यागो विकार..
पग-पग परिश्रम..
जीवन-आधार..!!

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Wednesday, April 11, 2012

'इश्तिहार..'




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"है दम बहुत..
जानती हूँ..
बिखरना आदत नहीं..
इश्तिहार चिपका लेना..
रूह की स्याह दीवारों पर..!!"


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Friday, March 9, 2012

'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस..'

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर..कुछ पंक्तियाँ..


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"नारी का शोषण ना थम सकेगा कभी..
प्रयत्न करके देखलो सभी..
जो पाना है स्वयं को लक्ष्य..
निर्धारित हो जीवन का भक्ष्य..
करो सुशोभित अंतर्मन-ताज..
हर ह्रदय करे नमन-राज..
आती नहीं सुबह यूँ ही..
लाती सन्देश यही..
जिसने पहचाना मूल्य..
है वही परमात्मा तुल्य..!!"

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Tuesday, October 4, 2011

'साहस के सितारे..'


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"पथरा गयीं आँखें..
उत्साह ना हुआ कम..
बटोर लो..
साहस के सितारे..
प्रयोजन रहे दमखम..!!!"

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Monday, September 12, 2011

'ए-राही..'






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"भिन्न-भिन्न हों..
जीवन की राहें..

दुर्गम हों..
अनुभूति की दिशायें..

चलते रहना..
बढ़ते रहना..
ए-राही..

लक्ष्य के घुंघरू..
थाप से ही मचलते हैं..!!"


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Thursday, August 11, 2011

'फितरत..'




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"माना कि मुश्किलें कम ना होंगी..
हार के बैठ जायें..
ऐसी फितरत नहीं..!!!"


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Friday, March 25, 2011

'योगदान की पाठशाला..'




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"सजते-संवरते चंद्रमा की रंगमाला..
कोमल पुष्प की सुगन्धित वर्णमाला..
अद्भुत है संयोग..विशाल है मनोयोग..
होती है सरल..योगदान की पाठशाला..!!!"

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