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Monday, March 10, 2014

'संबंध आत्मीयता के..'






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"सुन्दरता से उपजे..
प्रेम से जो रोपे..

संबंध आत्मीयता के..!!"

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--आभारी हूँ..

Saturday, October 13, 2012

'प्रेम..'



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"नज़र भर का फेर..
तुम्हारा निश्छल प्रेम..

जीवन भर का स्तम्भ..
तुम्हारा पवित्र प्रेम..

नदिया भर का खनिज..
तुम्हारा कलकल प्रेम..!!"


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Sunday, October 7, 2012

'कविता..'





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"मेरी कविता की..
हर पंक्ति..
रची-बसी तुमसे..

सुबह की पहली लाली लिये..
चहकी तुमसे..

दोपहर की अल्हड़ वाणी लिये..
दहकी तुमसे..

शाम की मदमस्त रवानी लिये..
बहकी तुमसे..

रात की भीगी चांदनी लिये..
महकी तुमसे..!!"

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Sunday, April 8, 2012

'गुरुवर..'

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"कोलाहल परिश्रम से विचलित हुआ जाता है..
अंतर्मन से भावों का वेग निर्मल हुआ जाता है..

आभारी हूँ..गुरुवर, तुम शरण निखर हर क्षण..!!"

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Thursday, April 5, 2012

'हार्दिक शुभकामनायें..'

भगवान श्री महावीर स्वामी जी के जन्म कल्याणक के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनायें..


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"वीर अद्भूत भूमि..
करता रहूँ नमन..
उपकार अनेक तुम्हारे..
ऐसा उत्कृष्ट जीवन..!!"


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Friday, September 30, 2011

'आभारी हूँ..'





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"क्षण-क्षण निखरती रही..
घड़ी-घड़ी सजती रही..

स्पर्श से तुम्हारे..
हर स्वाँस चलती रही..

लक्ष्य की ओर प्रसंगित किया..
हर बाधा को पार किया..

अदम्य साहस सहारा बना..
अद्भूत शौर्य ढाल बना..

जीवन को उदेश्य मिला..
स्वप्न हर पूर्ण हुआ..

आभारी हूँ..
कृतज्ञ हूँ..
आदरणीय कलम..

तुमसे ही जीवनदान मिला..
यह अनमोल संसार मिला..!!!"


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Monday, February 7, 2011

'अर्पण है माँ..'


बसंत पंचमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ..!!

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"अर्पण है माँ..
चरणों में..

जगमगाती ज्योति से..
पायीं जो उपलब्धि..

जीवन की शाखा पर..
पायीं जो समृद्धि..

कठिन पगडण्डी से..
पायीं जो सिद्धि..

सर्वत्र साधना से..
पायीं जो शक्ति..

पुण्य संस्कारों से..
पायीं जो बुद्धि..

कृतज्ञ हूँ..

माँ सरस्वती..
करें स्वीकार..
वंदना..!!"


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Saturday, February 5, 2011

''पाषाण-ह्रदय..'


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"दूर हवा के झोंके से..
मचल जाता हूँ..
जीवन के हलके स्पर्श से..
संभल जाता हूँ..
जल की निर्मल बूँद से..
निखर जाता हूँ..
दिनकर की पहली किरण से..
चहक जाता हूँ..
चन्द्रमा की शीतल चाँदनी से..
महक जाता हूँ..

गहराई से गहरी है..
कुदरत की जादुई छड़ी..
'पाषाण-ह्रदय' सींच..
बनाया करुणा की लड़ी..!!"

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Monday, January 3, 2011

'दिव्य-दृष्टि का प्रसाद..'



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"प्रतिबिम्ब प्रभु का..
आभामंडल गुरु का..
सुयोग्य शिष्य पर..
बरसता है..
सदैव..
दिव्य-दृष्टि का प्रसाद..

रखते नहीं..
सामर्थ्य सभी..

पा सकें..
पावन-निश्रा..

कर सकें..
जीवन व्यवस्थित..

हो सकें..
समर्पित..

समा सकें..
गुणों का भण्डार..

मिटा सकें..
अहंकारी स्वभाव..

हे मानव..
त्याग की मूरत ही..
निश्चल भक्ति का परिणाम..
जिससे होते..
सकल सब काज..!!"


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Sunday, December 12, 2010

'आभारी हैं..'


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"हमराही उपवन के..
घनिष्ठ मित्र..
सुलभ जीवन के..
आभारी हैं..
ज्ञान-सागर के..!!"


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Saturday, December 11, 2010

'एक स्वतंत्र विचार..'





एक 'नैट फ्रेंड' को समर्पित..जिनसे यह लिखने की प्रेरणा मिली..

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"जिसने दिया जितना दाना..
उसका घरौंदा उतना लिया..

कभी इस डाल तो कभी उस डाल..
हर क्षण किसी का शरणा लिया..

राही हूँ..पंथी हूँ..ना कोई ठिकाना..
जो राह मिली..बस चल लिया..

ना किसी नगर की सीमा..
ना किसी देश की तारबंदी..
मानवता की पूँजी हूँ..
रज़ में लोट-पोट..
जीवन का #धरना किया...

संचय करो..या करो प्रवाहित..
अमर हूँ..अमूल्य हूँ..
किया समृद्धशाली..
जिसने मेरा वरना* किया..

गंगा-सा समर्पित..
हिमालय-सा अविचल..
शूरवीरों-सा साहसी..
वीरांगनाओं-सा अडिग..
किया न्योछावर स्वयं को..
जीवन **तरना दिया..

एक डोर में..
पिरो सुसज्जित..
रखना सदैव..
अंतर्मन के समीप..
'विचार' हूँ मैं..

'एक स्वतंत्र विचार'..!!"


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#धरना = पहचान देना..
*वरना = वरन करना/पहनना..
**तरना = पार लगवाना..

Tuesday, November 23, 2010

'स्मरण..'



ऋणी हूँ..अपने माँ-बापू जी की..जिन्होंने जीवन का हर पाठ पढ़ाया और चलना सिखाया....


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"बंधी डोर जिस क्षण..
हुआ पावन जीवन..
स्मरण रहेगा सर्वदा..
सींचा जो उपवन..!"

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