Showing posts with label अंतर्मन की पुकार... Show all posts
Showing posts with label अंतर्मन की पुकार... Show all posts

Friday, January 23, 2015

'बसंत-पंचमी..'





...

"वर दो..
भर दो..
शुष्क अंतर्मन..

तार दो..
सार दो..
कृतज्ञ मन..

पत्र दो..
छत्र दो..
प्रियंकाभिलाषी उपवन..!!"

...


--विद्या-प्रदात्री माँ के चरणों में कोटि-कोटि सहस्त्र वंदन..!!

बसंत-पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें..!!..!!

Sunday, November 30, 2014

'पलाश..'




...

"मेरे भीतर का पलाश खोज रहा है..रंग-भंगिमा..!! भाव-तूलिका से उकेर दो..सूक्ष्म-ताल..!!"

...

--स्वीकार लो..

Monday, September 15, 2014

'घाट-घाट..'




...


"प्रिये..
घाट-घाट..
घटा दो..
विकार-परिपूर्ण..
जलस्त्रोत्र मेरा..!!"


...

Wednesday, July 2, 2014

'स्वप्न..'




...


"मैं हर रात जीता हूँ..
हर सुबह..मेरी मृत्यु निश्चित है..

मुझे प्राण देना..
तुम्हारा कर्तव्य और धर्म है..

मैं अंतरात्मा में पलता..
स्वप्न हूँ, वत्स..!!"

...

--यथार्थ..

Sunday, April 6, 2014

'डिमांड..'








...

"तुम्हें पा ज़िन्दगी से नाता तोड़ा था जब..
एहसां ज़िन्दगी पर..कर दिया था बस..

कहती थी तुमसे हाले-दिल सुबह-शाम..
इसीलिए सर झुका गया..फ़क़त आसमान..

मुझे मुझसे बेहतर तुमने था जाना..
बिखरा कैसे..आज ये आशियाना..

'कुछ भी' डिमांड करना आदत थी..
रूह के पोर-पोर को राहत थी..

जां..तुम बिन कटती नहीं रतियां..
आ जाओ..कि बनती नहीं बतियां..!!"

...

--मिस यू..बैडली..

Tuesday, October 29, 2013

'प्रार्थना..'





...

"हर पल ख़ुदको नम रखना..
पास न कोई गम रखना..
जानते हैं वो अंतर्मन की बातें..
प्रार्थना में अपनी दम रखना..!!"

...

Tuesday, July 2, 2013

'शरणागत..'




...

"समर्पण..
अद्भुत..
भाव..

शरणागत..
हूँ..
नाथ..

दुर्गुण..
दूर..
करो..

स्वीकारो..
मोहे..
आज..!!"

...

Friday, November 9, 2012

'मन की बगिया..'




...

"इक तेरा चित्र खिला जबसे..
मन की बगिया में..
उभर आये लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी पुष्प कितने..
बिखेरती है सूरज की आभा..
जब अपना स्वर्णिम..
लरजती है..
ओस की बूँद तभी..

चलो,
बहुत हुआ..
यूँ ना नश्वर को और नश्वर बनाओ..
समीप आ..
पुष्प अर्पण कर
प्रभुवर शीश नवाओ..!!"

...

Friday, May 11, 2012

'अभिलाषा..'



...


"चलने का प्रयोजन..
न पता था..
जिस क्षण दिया..
हाथ में हाथ..
किंचित ही भ्रम था..
अर्पित कर स्वयं..
मुक्ति-द्वार की अभिलाषा..
अवतरित हो हे-ईश..
बुझाओ तुच्छ-पिपासा..!!"

...

Monday, April 2, 2012

'कालचक्र..'

...


"निश्चित रहा..कालचक्र..
बंटते ह्रदय के तार..

चौपड़ के खाने..
लिखते नया अध्याय..

जीवंत कौशल देख..
अचंभित हुआ..
हर एक बाल..

क्यों संभव नहीं..
मानव-उद्धार..
जटिल भाव..
फैलाते वैर-भाव..

मधुर वाणी..
सरल विचार..
तारे भाव-पार..!!"


...

Thursday, March 29, 2012

'अंतर्मन चर्चा..'

...


"अमूल्य वचन..
संयमित दिनचर्या..
सरल जीवनयापन..
करुणामयी दृष्टि..
दयालु प्रवृत्ति..
ऐसी रहे..
अंतर्मन चर्चा..!!"


...

Friday, December 2, 2011

'जुस्तजू..'




...


"आ..
मेरे शौक से जुस्तजू करले..

जो ना है मेरा..
भर दूंगा दामन में तेरे..

इक बार..
फ़क़त..
इक बार..
मुझे रूह में भर ले.!!!".


...

Monday, October 24, 2011

'बचपन..'





कुछ वर्षों पहले लिखी थी..बिना कोई संशोधन पुनः प्रेषित हैं..



...


"बचपन सहेजकर रखा था..
एक पुराने बक्से में..

कुछ खिलौनें..
कुछ गुड़िया..
कोई कश्ती..
कोई गदा..

कुछ तीर-कमान..
कुछ आँसू की पुड़िया..
कोई ताबीज़..
कोई धागा..

कुछ भूली-बिसरी यादें..
कुछ गुलमोहर के फूल..
कुछ इमली के बीज..
कुछ बगीचे की धूल..

थोड़ी मासूम-सी हाथापाई..
कुछ पुराने सिक्के..
कुछ गुड़ के चक्के..
कुछ सरसों और मक्के..

थोड़े पुराने ख़त..
कुछ तितालियों के रंग..
कुछ दरिया का पानी..
कुछ चबूतरे तंग..

कुछ खिलखिलाती तस्वीरें..
कुछ कुरते के बटन..
कुछ जूतों की तस्में..
कुछ यारों के टशन..

दीवाली की सफाई में..
सब बेच दिया है..

सुना है..

मार्केटिंग वाले..
सब एक्सेप्ट करते हैं..
इस फेस्टिव सीज़न में..!"


...

Thursday, September 22, 2011

'जीवन की धार..'




...


"व्यर्थ लुटाता रहा..
जीवन की धार..

लक्ष्य समीप..
ह्रदय के हार..

क्यूँ विचलित हुए..
गुण-रुपी श्रृंगार..

परिभाषा सरल..
दुर्लभ हैं संस्कार..

चहुँ ओर विचर..
ना मिले सत्कार..

चिंतन-मनन दिखलाए..
संयम सुसंस्कृत आधार..

किया जिसने ग्रहण..
हुआ भवसागर पार..!!"


...

Thursday, September 15, 2011

'समर्पित जीवन..'




...


"स्वयं का परिचय..
असंभव कार्य..

दिशा-निर्माण..
प्रभु-चरण-रज..

समर्पित जीवन..
कृतज्ञता का भान..

सेवामयी अभिलाषा..
हर पुस्तक का आधार..

करो स्वीकार वंदन मेरा..
सम्पूर्ण जगत के पालनहार..!!"


...

Wednesday, September 7, 2011

'बारिश की बूँदें..'






...


"कुछ बारिश की बूँदें..
गीली ना होतीं काश..
थमा देती..
जज्बातों के लिहाफ..!!"


...

Monday, July 18, 2011

'जिंदा रखती हूँ..'



...



"जिंदा रखती हूँ..
कलम में..
लौ की पहली साँझ..
शब्दों की पहली मर्यादा..
और..
अच्छाई की पहली लड़ाई..
करना कृपा..
बिछा सकूँ..
करुणा और दया की चटाई..!!"


...

Sunday, May 22, 2011

' चंचल डाली..'




...


"मासूम भावनाओं से चित्रित..
ह्रदय की चंचल डाली..
थाम..
चुरा ले गए..
शान्ति की हरियाली..
क्षमा करना..
ए-प्रियवर..
बन गए हो..
तुम मेरे स्वाभिमानी..!!"


...

Saturday, May 7, 2011

'नाम..'



...


"वफ़ा की धुंध..
नाम जानती है..
हमारा..
बाँध देती है..
नज़रों के तार..
लबालब जज़्बात..
और..
मोहब्बत का नज़राना..

जाओ..
किसी रोज़..
छानने कूचे की ख़ाक..
पाओगे लिखा..
फ़क़त..
नाम..
तुम्हारा-हमारा..!!"


...

Monday, February 7, 2011

'अर्पण है माँ..'


बसंत पंचमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ..!!

...


"अर्पण है माँ..
चरणों में..

जगमगाती ज्योति से..
पायीं जो उपलब्धि..

जीवन की शाखा पर..
पायीं जो समृद्धि..

कठिन पगडण्डी से..
पायीं जो सिद्धि..

सर्वत्र साधना से..
पायीं जो शक्ति..

पुण्य संस्कारों से..
पायीं जो बुद्धि..

कृतज्ञ हूँ..

माँ सरस्वती..
करें स्वीकार..
वंदना..!!"


...