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Monday, February 3, 2014

'सेंसिटिविटी मैनेजमेंट..'







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"जाने नाम क्यूँ ज़रूरी था एडमिशन फॉर्म पर मेंशन करना.??? निखिल ने एक नामी कॉलेज में फैकल्टी का फॉर्म भरते हुए सोचा..मेरी पर्सनल लाईफ(रिलेशनशिप स्टेटस, स्पाउस का नाम, ऑक्यूपेशन, किड्स की इन्फो) से मेरे टैलेंट का एनालिसिस..???

आज अगर पर्सनल फ्रंट पर क्राइसिस है तो प्रोफेशनल फ्रंट पर भी क्राइसिस शुरू हो जाए.. बौद्धिक स्तर से मानवीय मूल्यों का ह्रास हो गया..!!

काश, इन सो-कॉल्ड ह्यूमन रिसोर्स एक्सपर्ट्स को 'फाइनेंशियल मैनेजमेंट' की जगह 'सेंसिटिविटी मैनेजमेंट' सब्जेक्ट पर लेक्चर दे सकता.. पुअर फैलोज़..!!"

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Friday, January 31, 2014

'ब्रॉड-माइंडेड..'







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"सुनो, तुमने शिखर को मैसेज कर दिया न कि वो तुम्हें अबसे परेशां न किया करे.. बहुत हुआ उसका अब, जब देखो WhatsApp पर किसी न किसी बहाने तुमसे जुड़ना चाहता है..!!"

"हाँ, मैंने लिख दिया था..!! और तुमने नेहा को बोल दिया..यूँ लेट नाईट वीडियोज़ न भेजा करें तुमको..!!"

"अरे, क्या तुम भी..?? कॉलेज की फ्रेंड है..दो-चार वीडियो भेज दिए तो क्या हुआ..?? तुम्हारी सोच भी दकियानूसी हो गयी है..!!"

"मैं..और वो भी दकियानूसी..??" स्नेह ने सोचा.."क्या ये वो ही अरविन्द है जिसे मेरे 'ब्रॉड-माइंडेड' होने पर गर्व हुआ करता था..? कैसे हम 'बैस्ट फ्रेंड्ज़ से बैस्ट क्रिटिक हो गए..?? शिखर का सिंपल मैसेज भेजना गुनाह और नेहा का लेट नाईट वीडियोज़ भेजना कैज़ुअल बात..????

शायद टेक्नो-सैवी होने के साईड इफेक्ट्स हैं.. पर्सनल स्पेस को वैरी पर्सनल में ट्रांसफॉर्म करना ही इसकी जीत है..!!"

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Sunday, June 30, 2013

'शोहरत के मुहताज़..'



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"कुछ तीस रोज़ बाकी हैं..मेरे वादे का शायद पहला फेज़ पूरा हो जाए..शायद आपकी हसरतें मुझ तक पहुँच जायें..इल्म हो जाए इन धमनियों को कि इस कैनवस पर कभी किसी और की कोई भी तस्वीर नहीं लग सकती..!!! रेत की स्याह लकीरों पे रोशन इक वजूद तेरा..ता-उम्र मुझपर रेशम-सा झरेगा..

'आठ' बजे के दर्द का रिसना आपके 'नाम' रहेगा..हिसाब-किताब तो मुझसे ज्यादा आप ही करते हैं न..!!!

आपकी सख्तियाँ बरबस ही मेरे मन की हंसी चुरा लें गयीं..पर LHS मेरा इंतज़ार करता है, जानती हूँ..और आप भी इस सच से वाकिफ़ हैं..!!! हैं ना?? मेरी उँगलियों के पोर तरसते हैं उन घेरों के लिए..मेरी साँसें आपकी गर्माहट बखूबी जानतीं हैं..!!!!

आज बार-बार पूछती रही ख़ुद से..'आपका और मेरा रिश्ता क्या है, आखिर??'...सारे जवाब दरिया में क़ैद अपनी आजादी की राह देख रहे हैं..!!!"

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--शोहरत के मुहताज़ सिलवटों के सौदागर..

Tuesday, May 21, 2013

'आवारा वज़ूद..'






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"रिश्तों का बोझ यूँ भी उठाते थे हम..तेरे मिलने के बाद जीने लगे थे..!! तुम्हें जाना था चले जाते..क्यूँ नापे फ़क़त जिस्म के रेशे.. रेज़ा-रेज़ा छिल गयी रूह और तुम्हें मुझसे बाबस्ता ना रहा.. क्यूँ इतने करीब लाये कि साँसें भूल गयीं चलने, बिन तेरे..!!!

किसी सज़ा से डरता नहीं..तेरी ख़ामोशी चीर चुकी रग-रग.. स्याह बेज़ुबां आवारा वज़ूद..!!!!"

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---कुछ फैसले आपके हाथ में नहीं होते, बस निभाने पड़ते हैं..जैसे..जीना तुम बिन..

Monday, May 20, 2013

'ज़िंदा जिस्म..'





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"दफ़अतन तुम्हारे ज़ेहन से कैसे उतर गयी..गिर बाँहों से गर्द हो गयी.. क्या गुनाह हुआ..कहाँ छूटी तपिश.. तड़पती रातें..फफकती साँसें..बेआबरू रूह..!!!

एक रत्ती मिट्टी..एक गज़ सूत.. ज़िंदा जिस्म..बेबस हसरत..अदद अश्क..बोझिल आँखें.."

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---तेरे बिन थक गयीं हैं आहें..

Sunday, May 19, 2013

'इक गमला..'




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"तेरी याद का इक गमला रखा था जो मेज़ पर साथ बीते पलों के बीज वाला..फलने-फूलने लगा है..जब भी वहशत का तूफां आता है, नर्म साँसों की टहनी रूह की वादियों में कर देती है बौछार..!!! सिलवटों का असर उतर आया है गुलों की रंगत में..उँगलियों के पोर से सहलाती हूँ जब पत्तियाँ, कसती गिरफ़्त बढ़ा जाती है धड़कन..!!!

पर तुम नहीं होते हो..और यूँ ही मचलता है आफ़ताब की चांदनी से इसका जिस्म.. तरसती रूह हर शै वास्ते, मेरे जोगिया..!!!"


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---सन्डे नाईट थॉट्स..

Friday, May 17, 2013

'दूरियां..'





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"कुछ तीस दिन गुज़र गए..ना जाने कितनी सदियाँ बीत गयीं..तुम नहीं आये..!!! किस ज़ुर्म की सज़ा पा रही हूँ..नहीं जानती.. रेज़ा-रेज़ा राख़ में तब्दील होती रूह की तकदीर..!!!"

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---दुनिया गले लगाती रही, इक तुम ही दूरियां बढ़ाते रहे..

Thursday, April 25, 2013

'ख़्वाब..'



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"कल रात ख़्वाब की चादर ओढ़े तुम मेरी चादर की सूत बन लिपटी रहीं.. अपने शहर से मेरे शहर का सफ़र..दुनिया की नज़रों से छुपते-छुपाते..मुझ तक आयीं तुम..!!!

ना जाने किन ख्यालों में खो गयीं थीं तुम्हारी उदास आँखें..मैं ढूँढता रहा अपनी कार में तुम्हें..!! बरबस बहते ही जा रहे थे..तुम्हारी काली आँखों से बेशुमार मोती..कार के डैशबोर्ड पर रखे टिश्यू पेपर बॉक्स से एक सफ़ेद टिश्यू निकाल तुम्हें जैसे ही दिया..तुम बिफर गयीं..जैसे एक बिजली गिर गयी थी मुझ पर..!!! इतना कमजोर और बेबस कभी महसूस नहीं किया था ख़ुदको..!!

क्यूँ ज़िन्दगी ऐसे मुकाम पर ले आती है, जहाँ हमारा सबसे प्यारा दोस्त सामने हो और उसे संभाल भी नहीं सकते..बांहों में भी नहीं भर सकते..!!! तुम्हारी ख़ामोशी मुझे चीर रही थी..सहला ना सका तुम्हारे ज़ख्म, जल गया मेरे होने का दंभ.. कितना बैगैरत..संगदिल..

दफ़अतन..ख़्वाब टूट गया..और किरच-किरच बिखर गए सपने..!!!"

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--सुबह से बहुत मिस कर रहा था तुम्हें..!!! कर सकता हूँ ना..??

Sunday, March 3, 2013

'वस्ल की तपिश..'



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"कितनी रातों से अधूरी थी..तेरी एक छुअन से नम हुई चाँदनी और सिमट गये बेशुमारे सितारे.. सिलवटें भी तरस गयीं थीं, वस्ल की तपिश के लिये..!!!"

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--ज़ालिम नज़ारे..बेचैन रातें..

'बेशुमार अब्र..'



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"दर्द अपना ना जाने क्यूँ दफ़ना दिया सरे-राह..सोचती थी बहुत हैं जो समझते होंगे हाल-ए-दिल..पर, हर दफा आपका सोचा सच हो..ऐसा नहीं होता..!!! फ़लसफ़ा-ए-ज़िन्दगी अजब रंगीली है..तलाशो जहाँ निशां, वहाँ रेत बहती नहीं हर अश्क के साथ..संग पे पैबंद बेशुमार अब्र, इक फटे तो दूसरा निभाये बेरुखी अपनी..!!"

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---कुछ दर्द अपने होते हैं..सिर्फ अपने..

'नक़ाबी मकां..'



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"फ़रेबी रिश्ते..नफ़रत भी थक गयी इन से नफ़रत करते-करते..!!! मेरी रूह पर उकेरे हैं जो नासूर तुमने, कभी ना मिटने पाये...इतनी दुआ अता करना, ए-ख़ुदा..!!!"

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---नक़ाबी मकां..खंज़र लपेटे इंसानी शरीर..

Friday, February 22, 2013

'प्यार-प्यार..'



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"तुम्हारी हर धड़कन क्यूँ लेती है मेरा नाम..?? फिर तुम मुझे जानते ही कितना हो..कोई १५ दिन पुरानी ही होगी ना हमारी मुलाकात.. क्यूँ इतनी गहरी उतर गयी है मेरी खुशबू तुम्हारे ज़ेहन में कि अब उसके बिना तुम मचल जाते हो..?? तुम्हारी हर कोशिका क्यूँ मुझे महसूस करना चाहती है..??

क्यूँ पिघल गयी तुम्हारी बेबाकी..?? क्यूँ खिल गया आँखों का सितारा मेरी आवाज़ सुन..?? क्यूँ मेरे इस बुखार से तुम्हारा मन भी तप-सा गया था..?? क्यूँ मुझसे बात करने के ख़ातिर ताक पर रख देते हो अपने ख़ूनी-रिश्ते..?? क्यूँ बदल दिया अपना समय इस अंतरजाल पर आने का..???

तुम प्यार-प्यार का दावा करते रहते थे..अब कहो...प्यार वो था जो अब तक तुमने जाना था....या फिर ये सब है..??"

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---अनकहे लफ्ज़..गैर-सा इंतज़ार..

Thursday, February 14, 2013

'राग दरबारी..'



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"क्यूँ गहरा सार था तेरी हर इक बात में..शब्दों के पीछे छिपे उन अनगिनत विचारों में बंधा था स्मृतियों का ठेला.. जानते थे मेरी मनोस्थिति, इसीलिए रोक लेते थे उस सफ़ेद दरिया का ज्वारभाटा भी..है ना..??? नकरात्मक गोलार्ध को तोड़ने के लिए बिछाते थे रेशम-से कोमल सकरात्मक तंतु..और उसपर छिड़कते जाते थे--जीवन से लबालब संगीतबद्ध शब्द-माल..!!!

इस सहृदयता को संजो दराज़ की 'राग दरबारी' में टांग दिया है..!!"

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---कुछ स्मृतियाँ धारा, राह, लक्ष्य सब बदल जाती हैं..

'ऐश्वर्या-पोलू : प्रेम की किश्तें - भाग ५..'






पाँचवी किश्त..शैतानी और मस्ती भरी..

***पाँचवा पत्र***

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प्रिय पोलू,

आज वैलेंटाइन'स डे है फिर भी हम जुदा हैं..मिल भी नहीं सकते.. आज सब रैलेतिव्ज़ डिनर पर आ रहे हैं..क्या करूँ, भाग भी नहीं सकती.. आज रात को सबके सोने के बाद मिलें, अपनी फैवी प्लेस पर..??

बहुत कुछ कहना है..तुम्हारे बिना कैसे गुज़रे ये दिन, ये रातें..सिर्फ हमारा दिल ही जाने..!!!

तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी,
ऐश..

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'ऐश्वर्या-पोलू : प्रेम की किश्तें - भाग ४..'







चौथी किश्त..शैतानी और मस्ती भरी..

***चौथा पत्र***

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प्रिय ऐश,

आज वैलेंटाइन'स डे है और तुम इतने दिनों से मिली भी नहीं हो.. लैट'स गो आउट फॉर डिनर टुनाइट, एक सरप्राइज है तुम्हारे लिए..!! ढेर सारी बातें करनी हैं..कितना कुछ कहना-सुनना है.. तुम भी इतने दिन कहाँ गायब रहीं, आई मिस्स्ड यू बेबी..!!!

नाओ, आई गौट्टा रश.. शाम को मिलते हैं.. सात बजे, गैलेक्सी होटल..!!

तुम्हारा..
पोलू..

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Sunday, February 3, 2013

'बक्शी ज़िन्दगी तुझे..'





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"फ़ुर्सत के पल में मर जाना चाहती हूँ..आकाश को रंगों से सजाना चाहती हूँ, बिखेरना चाहती हूँ अपने पसंदीदा रजनीगंधा और गुलमोहर के फूल.. किसी की परवाह नहीं, ना ही कोई चाहत..!!

बहुत हुई मनमानी, अब ना चलेगी तेरी कहानी.. हर लफ्ज़ मेरा होगा, हर शै अपनी.. जा कर ले जो मन आये, बिछा दे बारूद के गोले, मिला दे नफ़रत के घेरे..कोई रोक सकता नहीं, माप सकता नहीं कोई मेरी गहराई..तू भूला मुझे, इसमें तेरी ही भलाई..!!!

ज़िंदा हूँ, अपने दम पे..साँस टूटेगी, आँख-नम से..!!!

जा, जी ले.. बक्शी ज़िन्दगी तुझे..!!"


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Thursday, January 31, 2013

'ज़ालिम ज़माना..'








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"आँगन में फैला वो पुराना जामुन का पेड़ पूरे शबाब पर था..जलती दोपहरी, अलसाती दूब, मुरझाती चमेली, शर्मीली मेहन्दी, इठलाती चंपा, सुर्ख़ तपती बजरी, तनहा चूल्हा, अंगारे-सी तपती खाट...सब कुछ सूना-सा..

कमी थी तो बस उन शैतान तस्वीरों की, जो आज ना जाने किस डर से माँ के आँचल में छुपे बैठे थे..!!! शायद, सुबह-सुबह किसी मनचले ने मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ दिया.. न जाने कितनी बिजलियाँ गिरीं होंगी उन मासूमों पर, जो अपना गम भूला पूरा दिन सजाते हैं आशियाँ उन बाशिंदों के लिए जो उन्हें तहस-नहस कर हँसते हैं..!!!

ज़ालिम ज़माना..!!!"

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'ऐश्वर्या-पोलू : प्रेम की किश्तें - भाग ३..'






तीसरी किश्त..शैतानी और मस्ती भरी..

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***तीसरा पत्र***

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प्रिय ऐश,

कितने दिन हुए..तुम मुझसे मिलने भी नहीं आयीं..?? कबसे आँखें बिछाये बैठा हूँ, तुम जानती हो..आते-जाते सब दोस्त मेरे एक ही सवाल करते हैं, 'पोलू, क्या हुआ तुझको?? ये क्या हाल बना रखा है..बिलकुल देवदास टाइप्स लग रहा है..?? कहीं लव-शव तो नहीं हो गया तुझे.??? व्हाट्स गोइंग ऑन, बडी..??'...

हे बेबी, दिस हैज़ नैवर हैपंड विद में..मैं कभी भी किसी का इंतज़ार कर इतना बेचैन नहीं हुआ..ऐसा क्यूँ हो रहा है, एनी आईडिया..??? मिस्ड यू बैडली..रियली आई डू..!!!! जल्दी आओ ना..वेटिंग..

तुम्हारा..
पोलू..

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Tuesday, January 8, 2013

'अनकहे हर्फ़..'





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"चीर देना जिस्म मेरा..
रूह पे सदियों से तुम्हारा ही इख्तियार रहा..क्यूँ सुलगते हो इस जाड़े की बारिश में..आ जाओ, लपेट आँसुओं का फीता मेरे दिल की गिरह पर..!!!!
गाँठें पूरी शब खुलेंगी आज.. ले आना अपना फौलादी जिगर भी..!!!"


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----कुछ अनकहे हर्फ़ जो ता-उम्र जुबां में अटक ज़िन्दगी चुरा ले जाते हैं..हाँ, सच.....ज़िन्दगी..!!!

'तड़प ..'







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"बहुत कोशिश करी..ना रिसे तुम्हारी यादों की चाशनी.. पर, कौन रुका है... नहीं जानती मैं कौन हूँ..नहीं मानती मैं इस दुनिया की झूठी रिवायतें...नहीं जतलाना चाहती जो है नहीं मौजूद...फिर क्यूँ तुम समझते नहीं, मेरी बेचैनी..??? रात भर तड़पती हूँ बाँहों में तुम्हारी सो जाने को..पर...मेरी तड़प बस मेरी ही है..!!!! है ना..?? बिलकुल मेरी तन्हाई जैसी..!!"

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---तड़पती रूह के वारिस--चंद हर्फ़...शब भर फर्श पर बिखरे रहे..