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Thursday, October 16, 2014

'बेशकीमती..'





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"कुछ नॉर्मल चीज़ें यूँ ही बेशकीमती कैसे बन जातीं हैं..

उनका भेजा हुआ पैन अब तलक लॉकर में रखा है..!! स्याही भी साथ खूब निभाती है...कुछ आठ साल हुए होंगे..अभी भी जिंदा है..रवानी उसकी..!!"

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--दिल भी एक 'ग्लोबल' मुज़रिम है..जानेमन..<3

Friday, January 17, 2014

'नादां दिल..'






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"कहीं धुआं उठता रहा..
कहीं सुलगता रहा जिस्म..
कहीं धड़कने की ख़्वाहिशें थीं..
कहीं नादां दिल..
किसे समझाता..किसे बहलाता..
दोनों अपने थे..
और..
मैं बेगाना..!!"

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--एहसास कुछ पुराने..नए सिरे से..

Sunday, December 22, 2013

'स्याह दूरियां..'







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"जब-जब WhatsApp पर कोई मैसेज आता है.. वो पल आँखों में कितने सपने सजा जाता है..!! याद है न--'एक सौ सोलह चाँद की रातें..'....'एक तुम्हारे काँधे का तिल..'...

उसी काले तिल का एहसास..तुम्हारी छुअन का वो खूबसूरत लम्हा..रूह को तड़पा जाता है..!!"

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--स्याह दूरियां..बेबस आसमां..

Wednesday, July 17, 2013

'तखल्लुस..'





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प्रिय..

तुम क्या गए, मेरी ज़िन्दगी ही बदल गयी..दिन की खुरदुरी मीठी धूप और शाम की मखमली चाँदनी सब अपना वजूद खो बैठे..!!! निशाँ तुम्हारे इस जिस्म पर खुद को सहलाने लगे..रूह पे काबिज़ तुम्हारी साँसें थरथराने लगीं..

'जुदा हुआ खुद से..
जिस रोज़..
वक़्त ये ही था.
ना दरिया सूखा था..
ना नासूर उफ़ना था..

फिर यूँ हुआ..
ज़िन्दगी की रेल में..
चल पड़े रिश्ते..
और मैं छूट गया..!!!'

जाओ..खुश रहना..आबाद रहना..!! तुमसे रोशन हैं मजलिस बेशुमार..

नाम भी नहीं रहा..तखल्लुस लिखा तो उंगलियाँ उठ जायेंगी..

चलता हूँ..!!

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--मापने की मशीन की आवाज़..

Thursday, July 5, 2012

'टुकड़े..'




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"बीत जाता है..
सब कुछ..
समय के साथ..
शेष रहते हैं..
टुकड़े अनगिनत..
वियोग से सरोबार..!!"

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Sunday, December 11, 2011

'गुलाबी धूप..'





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"जाड़े की गुलाबी धूप..
तुम्हारी यादें..
नम आँखें..
बारहां..
छुपा रखता हूँ..
हर मज़लिस..!!"

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Friday, May 6, 2011

'कागज़ के फूल..'



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"आँचल तेरी यादों का..
रहने दे..
हम-ज़लीस..
थमेगी साँसों की डोरी..
बढाएंगे रंगत..
फ़क़त..
कागज़ के फूल..!!"


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Wednesday, May 4, 2011

'गिरफ्त साँसों की..'




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"चंद सवाल बल दे गए..
माज़ी को..
गिरफ्त साँसों की..
जकड़ती है..
अब तलक..!!"


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Wednesday, March 2, 2011

'रूह-का-इतर..'



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"बाँध तकिये से..
रख लूंगी..
काजल के मोती..
नापोगे दरिया की गहराई..
दबे मिलेंगे..
तेरे-मेरे..
एहसास..
अरमान..
और..
रूह-का-इतर..!!"

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'यादों के साये..'



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"अजीब हैं..
यादों के साये..
जब टटोलो..
चुप जाते हैं..
जब छुपाओ..
छलक जाते हैं..!!"

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Monday, January 31, 2011

'शब बना दे..'



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"जिस्म सुलगा दे..
रूह छलका दे..
आज फिर शब बना दे..


ख्वाब-ए-हसरत महका दे..
हयात-ए-शरीक दमका दे..
आज फिर शब बना दे..

जुल्फों के साये लहरा दे..
फासले दरमियाँ मिटा दे..
आज फिर शब बना दे..

सिलवटें गुलों से सजा दे..
ख़त निगाहों से सुना दे..
आज फिर शब बना दे..

रंगीन आँसू पिला दे..
मुझे तुझमें मिला दे..

हाँ..
आज फिर शब बना दे..

काजल तड़पा दे..
आगोश उलझा दे..
आज फिर शब बना दे..

मुद्दत से है ख्वाइश..
आज फिर शब बना दे..!"


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Thursday, November 4, 2010

'काजल के पन्ने..'


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"बहुत उलझे है..
चाहत के साये..
थाम लेना..
काजल के पन्ने..
और..
यादों के पाये..!!"

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Saturday, October 23, 2010

'तुम्हारी कलम..'



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"बेख़ौफ़ घूमता हूँ..
कूचे पे सनम..
ना मिलो..
ना देखो..
पैगाम भेजो..
राहगीरों के संग..
अश्कों में लिपटी..
तुम्हारी मखमली चादर..
खुशबू से तरबतर..
तुम्हारी कलम..
और..
चाहत से रंगरेज़..
मेरी रूह..!!"


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Thursday, September 2, 2010

'गरम यादें..'


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"गिरती संभलती..
कभी इस कोने..
तो कभी उस डाल..

धमा-चौकड़ी मचाती..
आँगन रंग बिखेरती..
शहनाई-सी मिठास..
बांसुरी-सी ताजगी..
घोलती सुरीली वाणी..

आज भी..
करीने से रखी है..
संदूक में..

मलमल दुपट्टे ओढ़े हुए..
उन ठंडी रातों की..
गरम यादें..!!"

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Thursday, March 18, 2010

'जज़्बात..'



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"नरम सफहों की..
बाँध गठरी..
रूह को तराशा फिर..

गुलों की महक..
इत्र हो जाती है..

बेजुबान अल्फाज़..
जज़्बात कई मर्तबा..
सुना जाते हैं..

रौशनी-ए-माहताब..
लूटा आई..
सुकूँ फिर..!!"

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