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Sunday, June 14, 2015

'माँ..'



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"संदर्भ था..माँ का..
साज़ था..माँ का..

अंतर्मन-रेखाओं पे..
पट्टा था..माँ का..

प्रतीक्षारत पौधे को..
नाज़ था..माँ का..

कोमल-डोर सींचने में..
दाम था..माँ का..

इन्द्रधनुषी छतरी को..
भरोसा था..माँ का..

चरित्र-निर्माण में..
ताप था..माँ का..

जटिल जीवन-अंक में..
सामीप्य था..माँ का..

काल-चक्र छाँव में..
स्नेह था..माँ का..!!"

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Friday, July 4, 2014

'माँ..'





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"पा प्रकाश..तुमसे..
पोषित होता जाता हूँ..
खिल जाते हैं..
भीतर के पुष्प..

माँ..
तुम तरु हो..
मेरा सामर्थ्य..
मेरी शक्ति..
मेरा ज्ञान..
मेरे मूल्य..
मेरा संसार..

तुम ही हो..
मेरा जीवन..!!

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Tuesday, May 27, 2014

'मज़बूत इस्पात..'






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"माँ का आँचल..और ममत्व..
सुनो माँ..
मैं सबसे सुरक्षित और मज़बूत इस्पात में पिघल..
करुणा और प्रेम का संचार करूँगा..
तुम थामे रखना..
हर आँधी के कण बुनूँगा..!!"

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Sunday, May 11, 2014

' माँ..'







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"चहुँ ओर माँ के लिए संदेश..अपना वर्चस्व जमा रहे हैं.. विस्मित होना आवश्यक है..हम भारतवर्ष के निवासी..और..माँ की महिमा का बखान..अंग्रेज़ों की इच्छाशक्ति अनुसार..??
माँ को नमन करना..क्या आज ही पर्याप्त है..??"


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--ज्ञान-चक्षु और ह्रदय-पटल की साझा योजना..

##तथाकथित अंग्रेज़ी वाला 'मदर्ज़ डे' के संदर्भ में..

Tuesday, May 6, 2014

'निखर उठा हूँ, माँ..'







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"कल-कल बहता अविराम जल का विशाल गठबंधन.. यूँ डोर असंभव थी, महासागर के असीम वेग में.. तुम्हारा वात्सल्य से सराबोर स्पर्श.. और मैं निखर उठा हूँ, माँ..!!"

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Sunday, May 12, 2013

'माँ..'

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"माँ के लिए भी सिर्फ एक दिन.?? ऐसा लगता है..या तो संसार विचित्र है या मुझ जैसे थोड़े और लोग भी..!!

बड़ा अद्भुत है परम-कृपालु मार्केटिंग वालों का जंजाल और उससे भी अधिक सुंदर है आजकल लोगों का बदलता हुआ मानसिक परिवेश..!!"

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---सो-कॉल्ड मदर्स डे पर..

Tuesday, April 5, 2011

'माँ..'


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"थका हूँ..
जब राहों पर..
थामा हाथ..
ढाढ़स बँधाया..
कृतज्ञ हूँ..
माँ..!!!"


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Friday, February 4, 2011

'माँ..'




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"देखता हूँ जब कभी..
आँखों के डेरे से..

समंदर लहराता है..
साँसों के फेरे से..

कैसे पहचान लेती हो..
बादल घनेरे से..

आँसू पोंछ देती हो..
आँचल के घेरे से..

वात्सल्य लूटाती हो..
सुबह-सवेरे से..

करुणामयी..
प्रेममयी..
स्नेही..

मेरी माँ..!!"

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Friday, December 17, 2010

'माँ..'





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"तेरे हाथों की बरकत..
तेरी दुआओं की शफ़क़त..
तेरी पाक़ इबादत..
तेरे तब्बसुम की क़ायनात..

*कामरां हुआ..
जिस रोज़ दामन..
जुड़ा पहलू से..!!!"

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*कामरां = Blessed/Fortunate..

Tuesday, June 15, 2010

'तेरी महक.. माँ..'



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"संदूक में लिपटी रखी है..
मासूमियत में डूबी..
बचपन की सुनहरी..
यादों की झड़ी..

साथ ले आती हैं..
अनगिनत क्षण..
वो अपनापन..
मीठे आँसू..
मीलों फैली मुस्कुराहट..
सतरंगी आत्मीयता..

ताज़ी है..
अब तक..
तेरी महक..
माँ..!!"

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Saturday, May 8, 2010

'माँ...'






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"महफूज़ रहा उम्र भर..तेरे साये से..
शफ्कत बरसता रहा..तेरे पाये से..

रोशन हुआ..फलक मेरा..
दुआ तेरी..उरूज मेरा..

मसरूर हुआ..वजूद मेरा..
महफिल तेरी..चरचा मेरा..

माँ...

तुझको अर्पण..

कुछ कलियाँ ताजी-सी..
कुछ यादें रूमानी-सी..
कुछ पलकें भीगी-सी..!"

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Saturday, December 26, 2009

माँ..


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"आती है याद जब भी...
नम हो जातीं हैं आँखें..

मिलता हूँ जब भी..
खिल जातीं हैं बाँछें..

त्याग की सूरत हो तुम..
मन-मंदिर की मूरत हो तुम..

बौना हो जाता हूँ..
वात्सल्य के पर्वत के आगे..

माँ..
तुझको नमन..

तुझको अर्पण..
सारी उपलब्धियाँ..!"

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Wednesday, December 23, 2009

माँ..तुझको अर्पण..


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"जब-जब थका हूँ..
आँचल में छाँव मिली..

जब-जब उठा हूँ..
वजूद को पहचां मिली..

जब-जब चला हूँ..
फिज़ा को अवाम मिली..

जब-जब चढ़ा हूँ..
शोलों को आगाज़ मिली..

माँ..
तुझको अर्पण..!"

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माँ का आँचल....


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"ता-उम्र साथ चलतीं रहीं..उसकी दुआएँ..
बन कर साया..गम झेलती रहीं..उसकी दुआएँ..१

बलाएँ सब मोड़ती रहीं..अपनी अदाएँ..
सबब-ए-ज़िन्दगी सिखाती रहीं..उसकी दुआएँ..२

संजो रहमत के मोती..शफ़क़त महकाती..
गम के तहखाने समेटती रहीं..उसकी दुआएँ..३

कितना मासूम है..उसका आँचल..
तीर सब हटाती रहीं..उसकी दुआएँ..४..!"

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