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Friday, January 15, 2021
'महफ़िल..'

Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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1/15/2021 07:35:00 AM
4
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ज़िन्दगी..
Sunday, February 10, 2019
'विचित्र संयोग..'

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"सपनों का वो पहले करिश्मा अब कहाँ स्थित है..
किसी ने सोचा, किसी ने ढूँढ़ने का यत्न किया, किसी ने कोई रपट लिखवाई..
सब यथावत हो गए..
समय की नोक पर विश्वास का खेत भरपूर कनक देता है..
धरा को एक क्षण पूज लेना, स्वतः ही अद्भुत संगम हो जाता है..
खिलाड़ियों का निर्माण क्षेत्र की आवश्यकता नापता है..
कमती-बढ़ती के उपहास, उपवास की रात्रि का शगुन होते हैं..
पूँजी उत्पादकता से होती है या उपवन की महकास से..
विचारधारा, विकास, निश्चित ही निस्तारित हो जाते हैं..
विचित्र संयोग है, सुगम पगडंडियों का कांकड़ी हो जाना..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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2/10/2019 09:56:00 AM
2
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Monday, September 26, 2016
'शिखर..'

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"जीवन की तलाश में..
फिरता रहा..
कितने अधर..
प्रस्फुटित तेरे गर्भ में..
मेरा हर शिखर..
तू समय की धार..
मैं तेरा भँवर..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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9/26/2016 11:09:00 AM
0
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Wednesday, February 11, 2015
'रेडियल स्टार्ज़..'

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"डायरी..पैन..कॉफ़ी मग..पास बुक..चैक बुक..मोबाइल.. जिस्म की थकान..रूह के टुकड़े..क़ैद हैं लफ़्ज़ों के पलंग पर..
लैपटॉप की कीज़..और माउस.. और हाँ.. जाड़े की सौगात..रजाई भी.. सब बिखरे पड़े हैं..तेरी याद में..
जब-जब भेजता हूँ..व्हाटसएप पर मैसेज..एक सैडी फेस भी भेज देता हूँ..और तुम कहते हो, 'क्या हर वक़्त..ये रोन्तोरू स्टीकर ही भेजते हो..!!'...
वो क्या जानें..दर्द मेरा..'तुम बिन जाऊँ कहाँ..'
थकी आँखों का पानी..स्लगिश एनर्जी..टॉर्नड एमोशंज़.. और सीलिंग पर जगमाते रेडियल स्टार्ज़..!!!"
...
--तलब-ए-ज़िंदगी..
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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2/11/2015 10:08:00 AM
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Monday, November 3, 2014
'तलब..'

#जां
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"तलब तेरी..
लगी ऐसी..
ए-ज़िन्दगी..
पीता जाऊँ...
सुबहो-शाम..
ज़ालिम हलक..
माँगता जाये..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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11/03/2014 08:53:00 AM
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Thursday, July 10, 2014
'गाथा..'

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"जीवन की अपनी परिभाषा है...हम कभी सुलझा लेते हैं अपनी गाथा...कभी उलझ जाते हैं दोहे..!!"
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Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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7/10/2014 11:57:00 AM
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Saturday, March 22, 2014
'दीवार-ए-रूह..'

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"पढ़ती हूँ जब-जब..तुमको लिखे ख़त बेशुमार..
नमी दीवार-ए-रूह..जाने क्यूँ उभर आती है..
आज दफ़ना दूँगी..बेसबब यादें..जज़्बात..
परत जाने कितनी..आँखों पे जम जाती है..
ज़िद भर-भर थैले.. परेशां अब न करेंगे..
मायूसी तेरी साँसों में रम-रम जाती है..
दूर रहना मेरा..गर पसंद है तुमको..जां..
वादा निभाने ख़ातिर.. मैं नम जाती हूँ..!!"
...
--मन उदास..अपुन आउटकास्ट..
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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3/22/2014 05:06:00 AM
6
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Tuesday, January 21, 2014
'मखौल..'
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"सपनों के टूटने पे आवाज़ नहीं होती इन दिनों..छुट्टी पर होंगे सब..
मखौल अपना बना क्या मिला..कल भी तुझसे दूर था..आज भी वहाँ ही रहा..!!"
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--ज़िन्दगी की कहानी..
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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1/21/2014 09:00:00 AM
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Sunday, December 15, 2013
'ज्वनशील तत्व..'

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"हम कभी-कभी कितने बेबस हो जाते हैं न.. आज चाहते हुए भी किसी की फोटो लाईक नहीं कर सकती, वैसे अच्छा ही है.. दो शब्द अगर तारीफ़ के लिख दूँगी तो अपनापन बढ़ जाएगा और फिर जाने कितने भाव उमड़ आयेंगे..
और फिर..कितने ज्वनशील तत्व उत्पात मचायेंगे..!!!
जीवन-धारा को बहने देती हूँ..
अपनी डगर पर चलती रहती हूँ..
मेरी पसंद-नापसंद से क्या होना है..
मैं अक्सर..यूँ ही कहती रहती हूँ..!!"
...
--कुछ सन्देश जो दिल से दिमाग तक पहुँचने में बहुत समय लगाते हैं..
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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12/15/2013 09:42:00 AM
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Tuesday, August 13, 2013
'दरकार..'

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"दहलीज़ थी इक..
दरमियां सफ़र बेशुमार..
सिमटी रही फ़क़त..
ज़िन्दगी की दरकार..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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8/13/2013 11:32:00 AM
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Thursday, June 20, 2013
'उठो..'

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"चलती-गिरती ज़िन्दगी की राहें..
उठो ख़ुद..नहीं आएँगी कोई बाँहें..!!
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Photo Courtesy - http://www.flickr.com/photos/ulfbodin/with/8014700704/
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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6/20/2013 06:04:00 AM
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Thursday, June 13, 2013
'अनमोल धरोहर..'

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"शीर्ष से उठ थाम अभिराम-चेतन..प्रस्फुटित होती हैं अनेक आकांक्षाएँ..!!! जानते हो न..ह्रदय की मलमल शाख का अविभाजित मूल्य..तुम अतुल्य हो, अमूल्य हो..!!
मेरे जीवन की अनमोल धरोहर हो..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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6/13/2013 11:53:00 AM
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Tuesday, June 11, 2013
'बेगैरत..'

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"क्या सब कुछ स्कोर पर डिपैंड करता है..
मेरी सक्सेस से ही सब अस्सैस करते हैं..
मेरी वैल्यूज़, एथिक्स की कोई वैल्यू नहीं..
मेरा कंसर्न नज़र नहीं होता कभी..
बर्बाद ही सही..इतनी बेगैरत भी नहीं..!!"
...
--ऐवें ही..
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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6/11/2013 05:52:00 AM
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'शफ़क़..'

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"बेदख़ल..
ज़ुल्फों को कर दूँ..
या..
घटाओं को..
सिलवटों को..
या..
करवटों को..
साहिलों को..
या..
सैलाबों को..
मुमकिन नहीं..
रेगिस्तां में शफ़क़..!!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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6/11/2013 05:30:00 AM
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Sunday, June 9, 2013
'फ़रियाद..'

...
"मेरे रहगुज़र में करीब..
मेरी ज़िन्दगी के हबीब..
जा लौट जा..
संग-सी चाहत..
और..
फ़रियाद..
मुमकिन नहीं..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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6/09/2013 04:29:00 AM
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Thursday, April 11, 2013
'बेज़ुबान हर्फ़..'

...
"उग आये हैं..
बेज़ुबान हर्फ़..
जिस्म के हर कोने..
क्या मुनासिब..
इक छुअन कभी..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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4/11/2013 09:18:00 AM
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Tuesday, December 11, 2012
'मन-आँगन..'

...
"सजीव चित्रण असंभव..
मूरत अमूर्त मन-आँगन..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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12/11/2012 12:51:00 PM
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Sunday, November 4, 2012
'बही-खाते ..'

...
"जीते रहेंगे आप सदा..
गुज़ारिश है ऊपर वाले से..
मरना-वरना खेल हमारा..
तुमको क्या बही-खाते से..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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11/04/2012 10:03:00 PM
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Wednesday, July 18, 2012
'विधि-विधान..'
...
"आना-जाना खेल जीवन का..
विधि-विधान बदल सके न कोई..
सुख-दुःख:..लेखा-जोखा..
भोग करे फसल जितनी बोई..!!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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7/18/2012 02:13:00 AM
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Sunday, May 6, 2012
'अधूरे सपने..'
...
"अधूरे सपने..
जुस्तजू..
अरमां..
हसरत..
और..
इक मंजिल..!!"
...
"अधूरे सपने..
जुस्तजू..
अरमां..
हसरत..
और..
इक मंजिल..!!"
...
Writer/शब्दों के कारोबारी..
priyankaabhilaashi
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5/06/2012 01:01:00 AM
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