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Sunday, January 20, 2013

'नयी तरकीब..'




हास्य-कविता..


**कृपया 'हास्य-रस' का पूर्ण उपयोग करें..और किसी भी शब्द को व्यक्ति-विशेष ना समझें..!!


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"आओ सीखें नयी तरकीब..
कैसे करें घोटाले जनता के बीच..

चलो गाँव की सैर पे जाएँ..
पहन जूते खाली परात उठायें..

रात गरीब-कुटिया में ना गुज़ारे..
केवल एक फोटो खिंचवायें..

पूरा देश कर रहा हो सवाल..
आप ए.सी. रूम में मौज लुटायें..

राजनीति में हाथ बँटाओ, युवा-शक्ति..
बदले में बैंक-बैलेंस, विदेशी सैर करायें..

कोई जीये-मरे..देश आर्थिक-हालात से जूझे..
अपुन विदेशी वेकेशन पर जायें..

चलो, अब बहुत हुआ देश-भक्ति का नाटक..
संस्कृति, मूल्यों, जनता का मखौल उड़ायें..!!"

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Friday, January 18, 2013

'हास्य कविता..'


कुछ हटकर...बहुत हुआ रोना-धोना, अब गया 'रोतलू पोस्ट्स' का सीज़न..

एन्जॉय फोल्क्स..

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"बहुत हुई तौहीन..
इस दफा..
अब लिखूँगी..
सिर्फ हास्य कविता..

कहिये जनाब..
आपके वहाँ ठंड है..??
इसलिए ट्रैफिक का..
आवागमन बंद है..

चल रहीं हैं..
बर्फीली हवाएँ..
आउटडेटेड हुईं..
तेरी अदाएँ..

रंगीली हो तुम..
मेरी जां..
प्लीज मत करो..
आँखें चार..

चलती हूँ..
नींद के पास..
मत लेना खर्राटे..
मेरे आसपास..!!"

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Friday, April 6, 2012

'गुलाबी जिस्म..'

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"तुझसे शुरू हो..
तुझपे ख़तम..
अजीब रस्ते हैं..
गुलाबी जिस्म की..
चौको रूह के..!!"


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Monday, December 5, 2011

'बज़्म..'





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"बज़्म में उनकी लूटा आया..
कारवां-ए-अश्क़..
३३ % एक्स्ट्रा ऑफर याद आया था..
फ़क़त..!!!"


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Friday, December 17, 2010

'अजीब प्रश्न..'





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"अजीब प्रश्न किया उन्होंने..
पूछा..
'क्या तुम हँसती हो..?'
कौन समझाए भला..
ऐसी बातों पर अवश्य ही..
मांसपेशियों को आराम नहीं देते..
दबदबाती..शर्माती आँखों से कहा..
'जी..'
'सुनिए..क्या आप शर्माती हैं..?'
यूँ दौड़ता हुआ इक विचार आया..
'क्या यह महानुभाव विवाह करेंगे..
या जीवन-भर व्यंग से निर्वाह करेंगे..?
हाथी के दाँत..खाने के और..दिखाने के और..
सामाजिक परिवेश भी क्या-क्या रंग दिखलाते हैं..
जीवन के महतवपूर्ण प्रसंग में चले आते हैं..
कितने अजीब यह दिल के बहुरूपी नाते हैं..'
..!!"


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Wednesday, December 23, 2009

'निमंत्रण की राह में..'





ये हमने अपने एक 'ऑनलाइन मित्र' की सहायता करने के लिए लिखी..उनकी एक सहकर्मी का विवाह सुनिश्चित हुआ है और वो भोज देने में थोड़ा हिचकिचा रहीं हैं.. बस उनको एक पत्र भेज दिया गया..



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"परम आदरणीया..

सुश्री सुष्मिता जी..

सर्वप्रथम, आपको आगामी जीवन की हार्दिक बधाईयाँ.. आपके मित्र-गण आपको इस उपलक्ष्य में एक सुंदर उपहार देना चाहते हैं..किन्तु वो आपके द्वारा दिए गए निमंत्रण के पश्चात ही संभव हो पायेगा..!!

आपकी ओर से आयोजित भोज के निमंत्रण की राह में..

आपके मित्र-गण..

आपके हितैषी..!!"


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आप सभी के विचारों की राह तकते हुए..



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