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Tuesday, December 6, 2011

'ज़र्रा-ज़र्रा..'



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"ज़र्रा-ज़र्रा बिक रहा था ईमां..
रेज़ा-रेज़ा लूटा रहा था वफ़ा..

अजीब है..दास्तान-ए-गलियारे-ए-सियासत..!!!"

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Monday, October 25, 2010

'सियासी मक्कारी..'

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"सवालों की भीड़..
चीरती रूह..
बेबसी महकाती..
सियासी मक्कारी..!!"

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Tuesday, September 14, 2010

'सत्ता की पगडंडियों से.. ढाणियों का सफ़र..'



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"क्या बदल सकोगे..
विश्वास की चादर का दाग..
क्या मिटा सकोगे..
महँगाई का चिराग..
क्या पहुँचा सकोगे..
संकरीं गलियों में *राग..
क्या लुभा सकोगे..
#बेज़ुबां पत्तियों का दिमाग..

आसां नहीं है..
यूँ सत्ता की पगडंडियों से..
ढाणियों का सफ़र..!!"


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*राग..= आवाज़..
#देश के अनगिनत प्रतिभाशाली विद्यार्थी..जो राजनीतिज्ञों की विलासता के आगे विवश हैं..