Thursday, February 17, 2011

'महताब की ज़ुबां..'




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"ज़ख्मों को सहलाने से..
यादों का गुलिस्तान..
महकने लगा..
क्या खलिश भेजी थी..
महताब की ज़ुबां..!!"


...

5 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना..

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

अजय कुमार said...

अच्छी रचना ,बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
सूचनार्थ