Wednesday, April 13, 2011

'जिद..'







...


"जिद है चाँद पाने की..
नींद गंवा..
टंगे हैं..
ख़्वाबों के अनचाहे ख्वाब..!!"


...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

यशवन्त माथुर said...

Fantastic!!!!

Er. सत्यम शिवम said...

ख्वाहिश है चाँद पाने के,और टँगे है सारे ख्वाब..बहुत सुंदर एहसास..विरह और मिलन दोनों रसों से मिला अनूठा प्रेम रस...जीवन का सार।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
इस कणिका का तो जवाब नहीं!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद सत्यम शिवम जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साहब..!!