Wednesday, August 28, 2013

'मंजिल..'






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"कभी-कभी बहुत लम्बी हो जातीं हैं राहें..मंजिल बारहां रूह से टंगी रहती है..!!"

...

--काश तुम समझते उलझनों की उलझन..

10 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज बृहस्पतिवार (29-08-2013) को कृष्णमयी चर्चा ( चर्चा - 1352 )
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मदन मोहन सक्सेना said...

बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
http://madan-saxena.blogspot.in/
http://mmsaxena.blogspot.in/
http://madanmohansaxena.blogspot.in/
http://mmsaxena69.blogspot.in/

Priyankaabhilaashi said...


धन्यवाद मयंक साब..

आभारी हूँ..

डॉ. मोनिका शर्मा said...

खूब ...

दिगम्बर नासवा said...

उलझनों की उलझन जो न समझे उसकी उलझन कभी न सुलझे ...

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अंदाज़.....

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मदन मोहन सक्सेना जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद डॉ. शर्मा जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद दिगम्बर नासवा जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!