Wednesday, December 3, 2014

'ज़िंदादिली..'





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"दोस्त मिले कुछ ऐसे..
ज़िंदादिली दलते रहे..

मैं था खाली हो रहा..
खुशियाँ अपनी मलते रहे..

उम्मीदे-साया घबराया जब..
शमा बन जलते रहे..

बेख़बर अकेला लुट रहा था..
ताबीज़ मानिंद फलते रहे..!!"

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6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (05.12.2014) को "ज़रा-सी रौशनी" (चर्चा अंक-1818)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

Priyanka Jain said...

धन्यवाद राजेंद्र कुमार जी..!!

सादर आभार..!!

Neeraj Kumar Neer said...

बहुत सुन्दर

Priyanka Jain said...

धन्यवाद नीरज कुमार नीर जी..!!

Digamber Naswa said...

खूबसूरत ख्यालात ...

Priyanka Jain said...

धन्यवाद दिगम्बर नास्वा जी..!!