
...
"सुनो जां..
लोकेशन चेंज करते हैं..
दरिया छोड़ यहाँ चलते हैं..
हर तरफ बर्फ़ की चादर..
नर्म रहेगा जिस्मों का फ़र..
अलाव ख़ुद जल जाएगा..
हमको रूमानी बनाएगा..
स्नो-फ्लेक्स गुदगुदायेगी..
देखना, उंगलियाँ कुनकुनायेंगी..
थाम लेंगे बोझिल साँसें..
लिख देंगे बेशुमार आयतें..
इक नुमाइश *मुक़य्यद..
इक शब मुकम्मल..
मैं आवारा**नक्शगर
तू ***रंगबस्त-ए-मोहब्बत..
चलो..फिर..
पैक करो..
इक जिस्म..
इक रूह..
इक साँस..
इक प्यास..!!"
...
*मुक़य्यद = बंदी/कैदी..
**नक्शगर = चित्रकार..
***रंगबस्त = पक्का रंग..
0 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
Post a Comment