Friday, April 4, 2014

'इनायत का कलाम..'






...

"जाने कब क्या समझ सकूँगी..
जो न समझी परतों की परत..
गम-ए-दरीचा कैसे समझ सकूँगी..

कहते वाईज़..इनायत तुमपे भी होगी..
जो न लिखा..वो कैसे समझ सकूँगी..

होने लगे फ़ीके..लफ्ज़ मेरे..इस कदर..
दर्द-ए-जानिब दर्द..अब कैसे समझ सकूँगी..

मिटा दो..नामों-निशां..रूह से अपनी..
पाठ-ए-मोहब्बत..कैसे समझ सकूँगी..

लिख रही हूँ..जाने क्या-क्या..सच है..
रदीफ़..मतला..बहर..कैसे समझ सकूँगी..!!"

...

--आपकी इनायत का कलाम कलम हो गया..

21 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

yashoda agrawal said...

आपकी लिखी रचना शनिवार 05 अप्रेल 2014 को लिंक की जाएगी...............
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद यशोदा अग्रवाल जी..!!!

सादर आभार..!!

Mithilesh dubey said...

लाजवाब। जितनी बार आपको पढता हूँ उतनी बार अलग अनुभूति होती है।

Priyanka Jain said...

धन्यवाद मिथिलेश दुबे जी..!!

Onkar said...

सुन्दर

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर भाव और अतिसुन्दर रचना

Yashwant Yash said...

कल 06/04/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक एक बार फिर होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

Priyanka Jain said...

धन्यवाद ओंकार जी..!!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद यशवंत जी..!!

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर.
नई पोस्ट : मिथकों में प्रकृति और पृथ्वी

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (06-04-2014) को "खामोशियों की सतह पर" (चर्चा मंच-1574) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Priyanka Jain said...

धन्यवाद राजीव कुमार झा जी..!!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद मयंक साब..!!

सादर आभार..!!

Onkar said...

सुन्दर रचना

Priyanka Jain said...

धन्यवाद ओंकार जी..!!

Priyanka Jain said...
This comment has been removed by the author.
Vaanbhatt said...

बहुत सुंदर रचना...

Digamber Naswa said...

बहुत खूब ... लाजवाब रचना ,,,

Priyanka Jain said...

धन्यवाद Vaanbhatt जी..!!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद दिगम्बर नासवा जी..!!