Sunday, April 6, 2014

'डिमांड..'








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"तुम्हें पा ज़िन्दगी से नाता तोड़ा था जब..
एहसां ज़िन्दगी पर..कर दिया था बस..

कहती थी तुमसे हाले-दिल सुबह-शाम..
इसीलिए सर झुका गया..फ़क़त आसमान..

मुझे मुझसे बेहतर तुमने था जाना..
बिखरा कैसे..आज ये आशियाना..

'कुछ भी' डिमांड करना आदत थी..
रूह के पोर-पोर को राहत थी..

जां..तुम बिन कटती नहीं रतियां..
आ जाओ..कि बनती नहीं बतियां..!!"

...

--मिस यू..बैडली..

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (08-04-2014) को "सबसे है ज्‍यादा मोहब्‍बत" (चर्चा मंच-1576) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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श्रीराम नवमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Priyanka Jain said...

धन्यवाद मयंक साब..

सादर आभार..!!

Vaanbhatt said...

बहुत खूब...सुंदर...

संजय भास्‍कर said...

बेहतरीन और बहुत कुछ लिख दिया आपने..... सार्थक अभिवयक्ति......

Priyanka Jain said...

धन्यवाद Vaanbhatt जी..!!

Priyanka Jain said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!

आशीष भाई said...

बहुत हि सुंदर प्रियंका जी , अच्छी रचना , धन्यवाद !
नवीन प्रकाशन -: साथी हाँथ बढ़ाना !
नवीन प्रकाशन -: सर्च इन्जिन कैसे कार्य करता है ? { How the search engine works ? }

Priyanka Jain said...

धन्यवाद आशीष जी..!!