Sunday, April 2, 2017

'मैत्री की गोष्ठी..'






#प्रेमराग

...

"तेरी-मेरी द्विपक्षीय वार्ता की महत्वपूर्ण नीति..

विकल्प चुन सकूँ..
ऐसी असाधारण कूटनीति कहाँ से लाऊँ..

संबंध प्रगाढ़ कर सकूँ..
ऐसी ज़मीनी गूढ़ता कहाँ से लाऊँ..

प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समझौता..
ऐसी गरमजोशी कहाँ से लाऊँ..

मुद्दे ज्ञापित कर सकूँ..
ऐसा प्रचारक कहाँ से लाऊँ..

वैचारिक मतभेद में भी कड़ी निजता..
अंततः दस्तावेज पर अंकित..
तुम्हारे-मेरे हस्ताक्षर..!!"

...

--मैत्री की गोष्ठी और समय का आँकड़ा..

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (04-04-2017) को

"जिन्दगी का गणित" (चर्चा अंक-2614)
पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
विक्रमी सम्वत् 2074 की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Digamber Naswa said...

वाह क्या बात है ... कितना कुछ बयान करते शब्द ... क्या क्या कह गए ...