Tuesday, June 15, 2010

'तेरी महक.. माँ..'



...


"संदूक में लिपटी रखी है..
मासूमियत में डूबी..
बचपन की सुनहरी..
यादों की झड़ी..

साथ ले आती हैं..
अनगिनत क्षण..
वो अपनापन..
मीठे आँसू..
मीलों फैली मुस्कुराहट..
सतरंगी आत्मीयता..

ताज़ी है..
अब तक..
तेरी महक..
माँ..!!"

...

6 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

दिलीप said...

maaki mahak to marte dam tak aur uske baad bhi baaki rahegi...maa aur bharat maa tumhe naman...bahut sundar panktiyan

Unknown said...

बहुत खूब...कितनी आत्मीयता और मार्मिकता के साथ कुछ ही शब्दों में आपने मां के विराट रूप को अभिव्यक्ति दी है..बधाई।

Unknown said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

Unknown said...

धन्यवाद दिलीप जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद उम्मेद जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद इन्डली जी..!!