Monday, December 24, 2012

'वक़्त..'




...

"बेबस नहीं..
बुज़दिल हूँ..

कहता नहीं..
सहता हूँ..

हर नफ्ज़..
मरता हूँ..

उठो..
चलो..

वक़्त बदलेगा..
खौफ़ मिटेगा..
इबादत तेरी..
हिम्मत तेरी..
रंग लाएगी..!!!"

...

1 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

दिगंबर नासवा said...

आमीन ... बस अब उठने का इंतज़ार है ...