Tuesday, April 12, 2016

'चलना ही ध्येय हो..'





...

"चलते चल, पथिक..
डगर का अस्तित्व..
तुझसे ही होगा..

बाँधते चल, नाविक..
लहर का सत्त्व..
तुझसे ही होगा..

संवारते चल, चितेरे..
महल का तत्व..
तुझसे ही होगा..

ढालते चल, विद्यार्थी..
पहल का रक्त..
तुझसे ही होगा..!!"

...

--चलना ही ध्येय हो..प्रतिक्षण..

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 14 अप्रैल 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

dilbag virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14 - 03 - 2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2312 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Unknown said...

हार्दिक धन्यवाद..यशोदा अग्रवाल जी..!

Unknown said...

सादर आभार..दिलबाग विर्क जी..

रश्मि शर्मा said...

बहुत सुंदर

Unknown said...

हार्दिक धन्यवाद..रश्मि शर्मा जी!

Unknown said...

OnlineGatha One Stop Publishing platform From India, Publish online books, get Instant ISBN, print on demand, online book selling, send abstract today: http://goo.gl/4ELv7C

iBlogger said...

प्रियंका जी, बहुत ही सुन्दर रचना है। आपने बहुत ही कम शब्दों में अच्छा संदेश दिया है।