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"मोहब्बत में सुलगे जिस्म..अब कहाँ मिलते हैं..
जिस्म से रूह के नाते..अब कहाँ सिलते हैं..१..
रहने दे बेरुखी का आलम..तेरे दर पे सनम..
बूढ़े दरख्त पे घरौंदे..अब कहाँ खिलते हैं..२..
उल्फत जगमगाती है सितारों को हर शब..
ज़ख़्मी आरज़ू-से रुखसार..अब कहाँ छिलते हैं..३..
वफ़ा की आँधी जलाएगी नश्तर..हर नफ्ज़..
हबीब की बाजुओं में ख्वाब..अब कहाँ हिलते हैं..४..!!"
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