Wednesday, November 10, 2010

'सूनापन..'


...


"नशे में गुज़रती रही शब..
लफ्ज़ उलझते रहे..
यादों की आहें..
वादियों की ज़ुबानी..
भूला सकूँगा क्या कभी..
इठलाती निगाहों का सूनापन..!!"


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4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

निर्मला कपिला said...

कितनी देर कमेन्ट बाक्स ढूँढती रही। सुन्दर रचना गागर मे सागर । चंद लम्हें भी कई बार पूरे जीवन पर छा जाते हं। शुभकामनायें।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सशक्त भावपूर्ण और सुंदर...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद निर्मला कपिला जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!