Friday, April 6, 2012

'गुलाबी जिस्म..'

...

"तुझसे शुरू हो..
तुझपे ख़तम..
अजीब रस्ते हैं..
गुलाबी जिस्म की..
चौको रूह के..!!"


...

3 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

दो-तीन दिनों तक नेट से बाहर रहा! एक मित्र के घर जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन मंगलवार को फिर देहरादून जाना है। इसलिए अभी सभी के यहाँ जाकर कमेंट करना सम्भव नहीं होगा। आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!!

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर...