Monday, September 24, 2012

'वजूद-ए-लहर..'



...

"काश..
बँध सकते..
रेत पे साहिल के घरोंदे..

पड़ता है टूटना..
हर पल..

फ़क़त..
बचाने..
वजूद-ए-लहर..!!"

...

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल २५/९/१२ मंगलवार को चर्चाकारा राजेश कुमारी के द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां स्वागत है

mridula pradhan said...

gagar men sagar.....

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद राजेश कुमारी जी..!!

आभारी हूँ..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मृदुला प्रधान जी..!!