Thursday, October 25, 2012

'चाहत के अशआर..'


...


"जानती थी..
नहीं आओगे..
ले जाना उस चौराहे पर खड़े..
गुलमोहर के तने पर लिखे..
चाहत के अशआर..
और..
दीवानगी के निशाँ..!!"


...

11 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 27/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सादर अभिवादन!
--
बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (27-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Onkar said...

सुन्दर कविता

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत खूब

Dr. sandhya tiwari said...

सुन्दर रचना ..............

Virendra Kumar Sharma said...

चाहत के अशआर

जानती थी नहीं आओगे ,
ले जाना उस चौराहे पे खड़े ,

गुलमोहर के तने पर लिखे ,
चाहत के अशआर और दीवानगी के निशाँ .

खूब सूरत प्रयोग धर्मी भाव कणिका .

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशोदा अग्रवाल जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साब..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद ओंकार जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद अंजू चौधरी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद डॉ संध्या तिवारी जी..!!