"एक मुद्दत बाद..
ख्याल आया..
देखा है..
चाँद को करीब से..
खुदा कुछ हिचकिचाया..
जुल्फें रंगीली..
निगाहें नशीली..
क्या ऐसा है..
कायनात का..
सबसे हसीं फ़रिश्ता..
लबों से महके हैं गुल..
नजाकत से सरोबर..
"चाँद मेरा सिमटा रहा.. शब भर.. रूह की गहराई नापता रहा.. शब भर.. मोल फिज़ा का लगता रहा.. शब भर.. बारिश की वो पहली बूँद-सा.. मेरा पहला प्यार.. मेरा पहला रूमानी एहसास.. मेरा पहला आईना..!!"
"लफ्ज़ बिखरे रहे.. अरमां सुलगते रहे.. आँसू सिमटे रहे.. खूं के कतरे जमे रहे.. कलम की स्याही भी.. सूख गयी.. ज़ख्मों को हवा दो कुछ.. नासूर झलकें.. रूह से अब..